केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है। न सिर्फ बस्तर बल्कि पूरे देश से नक्सल समस्या का सफाया हो गया है।
बस्तर वह क्षेत्र रहा है जो लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा। यहां के आदिवासी परिवार बंदूकों के साए में जीवन जीने को मजबूर थे। अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद वे पहली बार बस्तर आए हैं। अब यहां विकास की नई शुरुआत हो रही है। आम नागरिकों के लिए यह खबर राहत भरी है क्योंकि decades से चली आ रही हिंसा और भय की छाया अब हट रही है। इससे इलाके के लोगों का रोजमर्रा का जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियां बेहतर हो सकेंगी।
विकास रुकने की असली वजह थी नक्सलवाद
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास नहीं होने की वजह नक्सलवाद नहीं, बल्कि नक्सलवाद की वजह से विकास रुक गया था। 19 मई 2026 की तारीख को उन्होंने बस्तर के भविष्य को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने आदिवासी कल्याण की दो बड़ी योजनाओं का ऐलान किया। बस्तर संभाग के हर आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस दी जाएगी। साथ ही यहां डेयरी का बड़ा नेटवर्क विकसित किया जाएगा। जंगलों के वनोपज का फायदा सीधे आदिवासियों तक पहुंचाने की भी योजना है। इन कदमों से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आदिवासी समुदाय आत्मनिर्भर बन सकेगा।
कांग्रेस पर निशाना, भाजपा सरकार में तेज कार्रवाई
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर 2023 को जब भाजपा की सरकार बनी, उसके बाद नक्सल विरोधी अभियान तेज हुआ। शाह ने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में नक्सल उन्मूलन में सहयोग नहीं मिला। अब परिणाम सबके सामने हैं।
बस्तर में अब भय का माहौल पूरी तरह समाप्त हो चुका है। शाह ने कहा कि पूरे क्षेत्र में उत्साह, विश्वास और भविष्य को लेकर आश्वस्तता का वातावरण दिख रहा है। लोग मुक्त सांस ले रहे हैं।
नक्सल मुक्त बस्तर में नई उम्मीदें
नक्सलवाद का अंत सिर्फ सुरक्षा की बात नहीं है। यह विकास की राह खोलता है। बस्तर जैसे क्षेत्र में जहां संसाधन भरपूर हैं, लेकिन हिंसा के कारण उनका दोहन नहीं हो पाता था, अब स्थिति बदल रही है। डेयरी नेटवर्क और वनोपज की योजनाएं स्थानीय रोजगार बढ़ाएंगी और युवाओं को बेहतर भविष्य देंगी।
अमित शाह का यह दौरा और उनके ऐलान न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए महत्व रखते हैं। अगर दावा सही साबित होता है तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान मिल सकता है। आम आदमी अब उम्मीद कर रहा है कि शांति के इस माहौल में विकास की योजनाएं तेजी से जमीन पर उतरें और बस्तर का चेहरा बदल जाए।


