नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम ने एक बार फिर मेडिकल आधार पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 90 वर्षीय आसाराम ने अपनी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए जमानत की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को 17 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। अब अदालत इस बात पर विचार करेगी कि मौजूदा चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें मेडिकल आधार पर राहत दी जाए या नहीं।
इंटरनल ब्लीडिंग के बाद AIIMS जोधपुर में भर्ती
आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 8 जुलाई को उन्हें अचानक आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ, जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें एम्स, जोधपुर में भर्ती कराया गया।
याचिका के अनुसार, चिकित्सकों ने उन्हें ‘हाई रिस्क पेशेंट’ बताया है। अदालत को यह भी बताया गया कि उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें रक्त चढ़ाना पड़ा और फिलहाल वे लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
इन्हीं स्वास्थ्य कारणों के आधार पर आसाराम ने मेडिकल जमानत देने की मांग की है।
17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
आसाराम की याचिका पर जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अब सुप्रीम कोर्ट 17 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करेगा। इसी दौरान अदालत उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी। फिलहाल अदालत ने जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
पहले भी मिल चुकी है मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत
यह पहली बार नहीं है जब आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अदालत से राहत मांगी हो। इससे पहले भी उन्हें इलाज के लिए मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
इलाज पूरा होने के बाद अदालत के निर्देशानुसार उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया था। अब स्वास्थ्य संबंधी नई परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने फिर से मेडिकल जमानत की मांग की है।
2018 में हुई थी उम्रकैद की सजा
आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को अपने आश्रम में एक नाबालिग शिष्या के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC), पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
फिलहाल उनकी नई याचिका केवल स्वास्थ्य संबंधी आधार पर दायर की गई है। अब यह तय करना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में होगा कि प्रस्तुत मेडिकल परिस्थितियां जमानत देने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। इसलिए इस मामले में अंतिम स्थिति 17 जुलाई को होने वाली सुनवाई और अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

