देश की राजनीति में मंगलवार शाम एक अहम पड़ाव आया, जब असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार थम गया। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। Bharatiya Janata Party ने प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh सहित कई बड़े चेहरों को मैदान में उतारा। वहीं Indian National Congress ने भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे नेताओं के जरिए चुनावी माहौल को गरम बनाए रखा। अब गेंद पूरी तरह मतदाताओं के पाले में है।
केरल: त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई दिलचस्पी
Kerala, जिसे हाल ही में “केरलम” नाम देने की पहल चर्चा में रही, इस बार तीन मोर्चों के बीच मुकाबला देख रहा है। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली LDF तीसरी बार सत्ता में वापसी का सपना देख रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF बदलाव के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। वहीं BJP पहली बार मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। यहां 2.71 करोड़ मतदाता 140 सीटों पर 800 से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे। 2021 में LDF ने 97 सीटें जीतकर इतिहास बनाया था, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा माना जा रहा है।
असम: सीधी टक्कर, सत्ता बनाम वापसी की लड़ाई
Assam में मुकाबला लगभग सीधा है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के Gaurav Gogoi पार्टी को फिर से मजबूत बनाने की चुनौती के साथ मैदान में हैं। यहां 2.5 करोड़ से ज्यादा मतदाता 126 सीटों पर वोट डालेंगे। 722 उम्मीदवारों में 59 महिलाएं भी शामिल हैं। बेरोजगारी, महंगाई और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दे इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2021 में NDA ने 76 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी। इस बार विपक्ष बिखरा हुआ है, जो सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक बड़ा फायदा बन सकता है।
पुडुचेरी: छोटे राज्य में बड़ा सियासी खेल
Puducherry में भी मुकाबला सीधा NDA और कांग्रेस-DMK गठबंधन के बीच है। मुख्यमंत्री N Rangasamy के नेतृत्व में NDA लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटना चाहता है। वहीं कांग्रेस और DMK गठबंधन आखिरी समय में सीट बंटवारे के साथ मैदान में उतरा है। इस चुनाव में अभिनेता से नेता बने Vijay भी चर्चा में हैं, जिनकी एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। यहां 30 सीटों वाली विधानसभा में वोटिंग 9 अप्रैल को होगी और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
अब जनता का फैसला, किसे मिलेगा जनादेश?
तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में चुनावी शोर थमने के बाद अब नजरें सिर्फ मतदाताओं पर टिक गई हैं। राजनीतिक दलों ने अपने-अपने वादे और रणनीतियां सामने रख दी हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे भरोसेमंद मानती है और किसके हाथ में सत्ता सौंपती है। 9 अप्रैल का मतदान और 4 मई के नतीजे तय करेंगे कि किसकी रणनीति सफल रही और किसे इंतजार करना होगा।

