दुनिया के सामने सख्त रुख अपनाने वाले Donald Trump एक तरफ ईरान को खुली धमकियां दे रहे थे, तो दूसरी ओर व्हाइट हाउस पर्दे के पीछे संघर्ष रोकने की कोशिश में जुटा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चुपचाप एक अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) की दिशा में काम कर रहा था। खासतौर पर Strait of Hormuz को फिर से खोलना इस रणनीति का अहम हिस्सा था। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दो हफ्ते का सीजफायर, लेकिन पहले तेज हुई बयानबाजी
तनाव के बीच आखिरकार अमेरिका, ईरान और इजरायल ने दो हफ्तों के सीजफायर पर सहमति बना ली। दिलचस्प बात यह रही कि इस घोषणा से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ईरान की “पूरी सभ्यता खत्म करने” की चेतावनी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप मार्च से ही सीजफायर के पक्ष में थे। तेल की बढ़ती कीमतें और ईरान की मजबूत स्थिति ने अमेरिका को जल्दी समाधान की दिशा में सोचने पर मजबूर किया।
पाकिस्तान बना मध्यस्थ, बैक-चैनल में चला बड़ा खेल
इस पूरे घटनाक्रम में Pakistan ने अहम भूमिका निभाई। अमेरिका ने इस्लामाबाद के जरिए तेहरान तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir ने इस बैक-चैनल कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम समय में असीम मुनीर ने ट्रंप, उपराष्ट्रपति JD Vance और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से लगातार बातचीत की। इसके बाद पाकिस्तान ने प्रस्ताव को सार्वजनिक भी किया, हालांकि एक ड्राफ्ट पोस्ट लीक होने से कई तरह की अटकलें भी लगने लगीं।
समझौते के लिए कई प्रस्ताव, धीरे-धीरे नरम पड़ा ईरान
बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ। अमेरिका ने 15 बिंदुओं का प्रस्ताव दिया, जबकि ईरान ने 5 और 10 बिंदुओं के जवाब पेश किए। धीरे-धीरे ईरान कुछ शर्तों में नरमी दिखाने को तैयार हुआ, जिसमें यूरेनियम भंडार पर सीमा स्वीकार करना भी शामिल था। हालांकि, Islamic Revolutionary Guard Corps से मंजूरी लेना ईरान के लिए चुनौती बना रहा।
अमेरिका का दावा: ‘ईरान ने खुद मांगा सीजफायर’
सीजफायर की घोषणा के साथ ही अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे “ऐतिहासिक जीत” बताया। उनका कहना था कि “ईरान ने खुद युद्धविराम की मांग की।” ट्रंप ने भी कहा कि पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के बाद उन्होंने दो हफ्तों के लिए बमबारी रोकने का फैसला लिया। वहीं ईरान ने संकेत दिया कि यदि उस पर हमला नहीं हुआ, तो वह भी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।
वैश्विक असर: तेल, सुरक्षा और कूटनीति पर नजर
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक क्षेत्रीय तनाव नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। खासकर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह दो हफ्तों का सीजफायर स्थायी शांति में बदलता है या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।

