BCI में बड़ा बवाल! को-चेयरमैन ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से मांगा इस्तीफा, 150 करोड़ फंड ट्रांसफर समेत गंभीर आरोप

BCI में बड़ा बवाल! को-चेयरमैन ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से मांगा इस्तीफा, 150 करोड़ फंड ट्रांसफर समेत गंभीर आरोप

देश की शीर्ष कानूनी नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर नेतृत्व को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से तत्काल इस्तीफा देने की औपचारिक मांग करते हुए छह पन्नों का विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने संस्था के कामकाज, वित्तीय फैसलों और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें BCI के फंड से कथित तौर पर 150 करोड़ रुपये एक निजी ट्रस्ट में स्थानांतरित करने, परिवार से जुड़े लोगों की नियुक्तियों और NALSAR विश्वविद्यालय के स्नातकों को लेकर जारी विवादित निर्देश जैसे मुद्दे शामिल हैं।

रेड्डी ने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति के पद पर बने रहने का नहीं, बल्कि पूरी संस्था की साख और वकीलों के भरोसे से जुड़ा है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इन आरोपों पर मनन कुमार मिश्रा की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस्तीफे के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम

वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने 22 अगस्त को लिखे पत्र में मनन कुमार मिश्रा से 15 दिनों के भीतर पद छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया अपने मूल मानकों से दूर चली गई है और अब नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है।

रेड्डी ने यह भी बताया कि उन्होंने करीब एक दशक तक मिश्रा के साथ काउंसिल में काम किया है और कई मुद्दों पर लंबे समय से असहमति बनी हुई थी। उनके अनुसार, उन्होंने इस्तीफे की मांग के समर्थन में आठ प्रमुख आधार भी पत्र में गिनाए हैं।

150 करोड़ रुपये के ट्रस्ट ट्रांसफर पर उठाए सवाल

पत्र का सबसे गंभीर आरोप BCI के फंड को लेकर है। रेड्डी का दावा है कि पहले से मौजूद BCI ट्रस्ट को निष्क्रिय होने दिया गया और वर्ष 2020 में ‘BCI Trust PEARL – First’ नाम से नया ट्रस्ट बनाया गया, जिसके ट्रस्टी कथित तौर पर चेयरमैन द्वारा चुने गए थे।

उनका आरोप है कि बाद में BCI के फंड से 150 करोड़ रुपये इस ट्रस्ट में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लाया गया। रेड्डी ने कहा कि उन्हें एडवोकेट्स एक्ट, 1961 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं मिला, जो किसी नियामक संस्था के धन को उसके चेयरमैन से जुड़े निजी ट्रस्ट में भेजने की अनुमति देता हो।

उन्होंने यह भी दावा किया कि काउंसिल के कई सदस्यों को ट्रस्ट डीड तक देखने का अवसर नहीं दिया गया।

लॉ कॉलेजों पर दबाव और नियुक्तियों को लेकर भी आरोप

रेड्डी ने पत्र में आरोप लगाया कि मान्यता या नवीनीकरण के लिए आने वाले लॉ कॉलेजों पर कथित तौर पर ट्रस्ट में योगदान देने का दबाव बनाया जाता है। उनके मुताबिक, यह राशि 25 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक बताई गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा हुआ है, तो नियामक शक्तियों का इस्तेमाल धन जुटाने के माध्यम के रूप में नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, उन्होंने काउंसिल में परिवार से जुड़े लोगों और व्यक्तिगत रूप से निकट व्यक्तियों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। रेड्डी का कहना है कि इन नियुक्तियों से जुड़े विज्ञापन, चयन प्रक्रिया या मेरिट सूची का रिकॉर्ड काउंसिल के सामने नहीं रखा गया।

NALSAR विवाद और 14 साल के कार्यकाल पर भी सवाल

पत्र में अगस्त 2026 में जारी उस विवादित निर्देश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के स्नातकों के नामांकन पर रोक लगाने को कहा गया था। रेड्डी का दावा है कि यह फैसला काउंसिल की औपचारिक मंजूरी के बिना जारी किया गया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन तथा सर्वोच्च अदालत की आलोचना के बाद इसे वापस लेना पड़ा।

उन्होंने इसे संस्था की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला फैसला बताया।

रेड्डी ने यह भी कहा कि मनन कुमार मिश्रा वर्ष 2012 से लगातार चेयरमैन बने हुए हैं, जबकि इस पद का कार्यकाल दो वर्ष का माना जाता है। उनके अनुसार, किसी निर्वाचित पद पर इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति का बने रहना संस्थागत संतुलन के लिए चिंता का विषय है।

विशेष ऑडिट और आपात बैठक की मांग

को-चेयरमैन ने BCI की विशेष बैठक बुलाने, CAG से संबद्ध स्वतंत्र फर्म से BCI और BCI Trust PEARL–First दोनों के खातों का विशेष ऑडिट कराने तथा लॉ कॉलेजों से कथित योगदान लेने की व्यवस्था बंद करने की भी मांग की है।

उन्होंने अपने पत्र के अंत में कहा कि युवा वकीलों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के छात्रों और कई बार एसोसिएशनों की ओर से भी नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ रही है। उनके अनुसार, जब किसी पेशे को नियंत्रित करने वाली संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगें, तो यह केवल व्यक्तिगत पद का नहीं बल्कि संस्था के भविष्य का मुद्दा बन जाता है।

फिलहाल, यह विवाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के भीतर नेतृत्व और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ चुका है। आगे यह देखना होगा कि इन आरोपों पर BCI और चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है और क्या काउंसिल इस मामले में कोई संस्थागत कदम उठाती है।