Bhopal DMS Protest: ‘KV में मर्ज नहीं होने देंगे’, भोपाल में पहली बार छात्रों का Gen Alpha प्रदर्शन, 400 बच्चे सड़क पर उतरे

Bhopal DMS Protest: ‘KV में मर्ज नहीं होने देंगे’, भोपाल में पहली बार छात्रों का Gen Alpha प्रदर्शन, 400 बच्चे सड़क पर उतरे

भोपाल में मंगलवार को ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने शिक्षा जगत के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींच लिया। राजधानी के रीजनल स्कूल (DMS) के करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं स्कूल के केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में प्रस्तावित विलय के विरोध में सड़कों पर उतर आए। इसे शहर का पहला ऐसा Gen Alpha Protest माना जा रहा है, जिसमें कम उम्र के छात्रों ने किसी शैक्षणिक संस्थान की पहचान बचाने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

छात्रों के हाथों में “Save DMS” और स्कूल की पहचान बचाने वाले पोस्टर थे। उन्होंने नारे लगाए, ज्ञापन सौंपा और साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

क्यों हो रहा है DMS के विलय का विरोध?

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि रीजनल स्कूल केवल एक सामान्य विद्यालय नहीं है, बल्कि यह शिक्षा में प्रयोग और नवाचार के लिए जाना जाता है। उनका मानना है कि यदि स्कूल का विलय केंद्रीय विद्यालय संगठन में होता है, तो उसकी मूल शैक्षणिक अवधारणा और अलग पहचान प्रभावित हो सकती है।

छात्रों ने रीजनल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एस.के. गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनकी सबसे बड़ी मांग यही है कि स्कूल को वर्तमान स्वरूप में बनाए रखा जाए और प्रस्तावित संविलयन पर पुनर्विचार किया जाए।

अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

इस आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की चिंताएं भी खुलकर सामने आईं। उनका कहना है कि रीजनल स्कूल वर्षों से ऐसे शैक्षणिक प्रयोगों का केंद्र रहा है, जिनके आधार पर देश की स्कूली शिक्षा में बदलाव किए जाते रहे हैं। इसलिए इस संस्थान की अलग पहचान को बनाए रखना जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल केंद्रीय विद्यालय की प्रवेश नीति को लेकर उठ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि KVS में प्रवेश के अपने अलग नियम और प्राथमिकताएं हैं। ऐसे में यदि विलय होता है, तो मौजूदा छात्रों और भविष्य में सामान्य परिवारों के बच्चों के प्रवेश पर क्या असर पड़ेगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

उनका यह भी कहना है कि इतने बड़े फैसले से पहले छात्रों और अभिभावकों से चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने सरकार और एनसीईआरटी से विलय के बाद की पूरी व्यवस्था सार्वजनिक करने की मांग की है।

1000 छात्रों की पढ़ाई और कई कोर्स पर सवाल

अभिभावकों के अनुसार, रीजनल स्कूल में नर्सरी से 12वीं तक करीब 1000 विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल में हर कक्षा में दो सेक्शन हैं और 11वीं-12वीं में कॉमर्स, आर्ट्स सहित विभिन्न विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। इसके अलावा यहां व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी संचालित होते हैं।

यही वजह है कि विलय के प्रस्ताव ने कई व्यावहारिक सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावक जानना चाहते हैं कि मौजूदा छात्रों की पढ़ाई, शिक्षकों की स्थिति, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का भविष्य और प्रवेश व्यवस्था का क्या होगा।

अब सरकार और NCERT से जवाब का इंतजार

फिलहाल छात्रों ने अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा दी है, लेकिन उनकी मांगों पर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

भोपाल का यह प्रदर्शन इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि इसमें नई पीढ़ी के छात्रों ने अपनी शैक्षणिक पहचान और भविष्य से जुड़े मुद्दे पर संगठित होकर आवाज उठाई। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और एनसीईआरटी इस संविलयन को लेकर क्या स्पष्टता देते हैं और छात्रों की आशंकाओं का समाधान किस तरह किया जाता है।