BJP की राज्यसभा लिस्ट में बड़ा फेरबदल: हरदीप पुरी, बीएल वर्मा समेत 7 मौजूदा सांसद OUT, जानिए किसे मिला मौका

BJP की राज्यसभा लिस्ट में बड़ा फेरबदल: हरदीप पुरी, बीएल वर्मा समेत 7 मौजूदा सांसद OUT, जानिए किसे मिला मौका

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने 8 उम्मीदवारों की घोषणा की है और खास बात यह है कि सभी नाम नए हैं। इसका सीधा असर उन मौजूदा बीजेपी सांसदों पर पड़ा है, जिनका कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होने वाला है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा, अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी को इस बार दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है।

बीजेपी की नई सूची को केवल टिकटों का बदलाव मानना मुश्किल है। इसमें संगठन से जुड़े नेताओं, OBC और दलित चेहरों के साथ महिलाओं को भी जगह दी गई है। यानी पार्टी ने राज्यसभा के लिए नए चेहरों को आगे करते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन साधने की कोशिश की है।

हरदीप पुरी से बीएल वर्मा तक, बड़े नामों की छुट्टी

नई सूची में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की है। पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। पूर्व राजनयिक रहे पुरी जनवरी 2018 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे थे। इस बार पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया।

दूसरा बड़ा नाम बीएल वर्मा का है। केंद्र सरकार में राज्य मंत्री वर्मा लोधी समाज से आते हैं और बदायूं क्षेत्र से उनका राजनीतिक आधार जुड़ा है। बीजेपी ने उनकी जगह धर्मपाल सिंह को मैदान में उतारा है। धर्मपाल सिंह भी लोधी समाज से हैं और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

यानी यहां पार्टी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व तो बरकरार रखा, लेकिन राज्यसभा के लिए चेहरा बदल दिया।

सात मौजूदा सांसदों को नहीं मिला दोबारा टिकट

उत्तर प्रदेश से बीजेपी के सात मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है। नई सूची में इनमें से किसी को दोबारा जगह नहीं मिली।

इनमें हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। नीरज शेखर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे और पूर्व सांसद हैं। बृजलाल पूर्व IPS अधिकारी रह चुके हैं। वहीं गीता शाक्य बीजेपी संगठन में सक्रिय रही हैं।

दिनेश शर्मा की सीट पहले ही खाली हो चुकी है। उन्हें अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी।

इस तरह बीजेपी ने मौजूदा राज्यसभा टीम में बड़े स्तर पर बदलाव किया है। पार्टी ने पुराने चेहरों पर दोबारा भरोसा करने के बजाय संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़े नेताओं को आगे किया है।

आठ नए नामों में OBC, दलित और महिला चेहरे भी

बीजेपी की नई सूची में धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, राम प्रताप सिंह चौहान, गोपी कृष्ण पाण्डेय, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा और श्रुति गंगवार शामिल हैं।

धर्मपाल सिंह के बाद प्रकाश पाल OBC समीकरण का अहम चेहरा हैं। वह यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। पाल समाज के बीच उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया है।

राम प्रताप सिंह चौहान संगठन के पुराने कार्यकर्ता हैं। वह आगरा की एत्मादपुर सीट से विधायक रह चुके हैं और प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने संगठन में अलग-अलग स्तरों पर करीब डेढ़ दशक तक काम किया है।

गोपी कृष्ण पाण्डेय भी लंबे समय से बीजेपी संगठन में सक्रिय रहे हैं।

दलित प्रतिनिधित्व में विद्यासागर सोनकर को जगह मिली है। वह पार्टी के पुराने दलित चेहरों में गिने जाते हैं और सांसद व MLC रह चुके हैं। उनका संबंध जौनपुर से है।

वहीं प्रियंका सिंह रावत को महिला और दलित प्रतिनिधित्व के तौर पर आगे किया गया है। वह बाराबंकी से सांसद रह चुकी हैं और फिलहाल बीजेपी की यूपी महासचिव हैं। अवध क्षेत्र में पार्टी के लिए उनका राजनीतिक महत्व है।

वकील से लेकर बैंक चेयरपर्सन तक, नए चेहरों की प्रोफाइल भी खास

बीजेपी ने इस बार पेशेवर पृष्ठभूमि वाले चेहरों को भी राज्यसभा की दौड़ में शामिल किया है।

राधाकांत ओझा प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह दो बार इलाहाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने जा चुके हैं। उनका चयन पार्टी की सूची में पेशेवर और कानूनी क्षेत्र से जुड़े चेहरे की मौजूदगी को दिखाता है।

वहीं श्रुति गंगवार बरेली की अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरपर्सन हैं। वह वरिष्ठ बीजेपी नेता और वर्तमान राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। बरेली-बहेड़ी क्षेत्र में उनकी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता रही है।

कुल मिलाकर बीजेपी की राज्यसभा सूची में इस बार सिर्फ चेहरे नहीं बदले गए हैं, बल्कि प्रतिनिधित्व का ढांचा भी बदला गया है। पुराने सांसदों में से किसी को दोबारा टिकट नहीं मिला, जबकि संगठन के अनुभवी नेताओं, OBC और दलित चेहरों तथा दो महिला नेताओं को आगे किया गया है।

16 अक्टूबर का राज्यसभा चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन नामों के जरिए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी अगली राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत दिया है। अब इन नए चेहरों की भूमिका सिर्फ राज्यसभा तक सीमित रहेगी या आने वाले समय में यूपी की राजनीति में भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां मिलेंगी, इस पर नजर रहेगी।