नसीरुद्दीन शाह के एक राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके से मुलाकात के बाद अभिनेता पीयूष मिश्रा ने उन पर तीखा तंज कसा है। मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह भी पहुंचे थे। प्रदर्शन के बाद अभिजीत दीपके को गले लगाते हुए उनका वीडियो सामने आया। इसी को लेकर पीयूष मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नसीरुद्दीन शाह सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय रख रहे हैं, तो उन्हें उन घटनाओं पर भी बोलना चाहिए, जिनमें लोगों की जान बचाने या लोगों की मदद से जुड़े मामले सामने आए हैं।
पीयूष मिश्रा ने अपनी टिप्पणी में स्मित मच्छार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 से जुड़े हादसे के दौरान उन्होंने 180 लोगों की जान बचाई। इसके साथ ही उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुए विवाद और झारखंड से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया।
CJP प्रदर्शन में पहुंचे थे नसीरुद्दीन शाह, वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद
मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इस प्रदर्शन में कई फिल्मी हस्तियां शामिल हुईं। नसीरुद्दीन शाह भी वहां पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ नसीरुद्दीन शाह की मुलाकात हुई। दोनों के गले मिलने का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया।
इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पीयूष मिश्रा ने सीधे नसीरुद्दीन शाह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वह उनके पुराने परिचित हैं और अभिजीत दीपके से उनकी मुलाकात देखकर उन्हें अच्छा लगा। इसके बाद उन्होंने स्मित मच्छार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कथित तौर पर 180 लोगों की जान बचाई और नसीरुद्दीन शाह को इस घटना पर भी अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
LPU विवाद का जिक्र कर बोले- बच्चों के लिए भी संदेश दीजिए
पीयूष मिश्रा ने अपनी टिप्पणी को यहीं नहीं रोका। उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU में हुए विवाद का भी जिक्र किया।
उनका कहना था कि वहां भी छात्रों से जुड़ा गंभीर घटनाक्रम सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में लड़कियों के बाल खींचे गए और स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। उन्होंने आगजनी और हंगामे का भी उल्लेख किया।
पीयूष मिश्रा ने इसी संदर्भ में नसीरुद्दीन शाह के एक पुराने बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह ने कभी कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और FTII ने जितना सिखाया, उतना ही बच्चों ने भी सिखाया है।
पीयूष मिश्रा ने इसी बात पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि बच्चे कब से एक्टिंग के शिक्षक हो गए। साथ ही उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से LPU के छात्रों के लिए भी संवेदना व्यक्त करने और एक संदेश देने की अपील की।
झारखंड का मुद्दा भी उठाया, नज्म को लेकर साधा निशाना
पीयूष मिश्रा ने अपनी बात में झारखंड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले नसीरुद्दीन शाह से झारखंड के लिए मदद मांगी थी। उनके मुताबिक, उस समय नसीरुद्दीन शाह की ओर से एक पाकिस्तानी शायरा की नज्म भेजी गई थी।
पीयूष मिश्रा ने कहा कि उस समय लोगों को कविता या नज्म की नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरतों की जरूरत थी। उन्होंने आटा, दाल, रोटी, गुड़, लिट्टी और चोखा जैसी चीजों का जिक्र किया।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के लोगों ने पिज्जा या बर्गर की मांग नहीं की थी। इसी क्रम में उन्होंने पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और लैटिन अमेरिकी शायरों की नज्मों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी रचनाएं उस स्थिति में लोगों की तत्काल जरूरतों का समाधान नहीं थीं।
पीयूष मिश्रा ने नज्म की भाषा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उसमें इस्तेमाल की गई उर्दू इतनी कठिन थी कि उन्हें खुद उसे समझने में परेशानी हुई, तो झारखंड के आम लोगों के लिए उसे समझना और भी मुश्किल रहा होगा।
‘जब भी बयान देंगे, पीयूष का जवाब मिलेगा’
पीयूष मिश्रा ने अपनी पूरी टिप्पणी के अंत में नसीरुद्दीन शाह को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि जब भी नसीरुद्दीन शाह कोई बयान देंगे, उन्हें उनकी तरफ से जवाब मिलेगा।
उनकी इस टिप्पणी ने दोनों अभिनेताओं के बीच सार्वजनिक असहमति को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ नसीरुद्दीन शाह का राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सामने आना जारी है, तो दूसरी तरफ पीयूष मिश्रा ने उनके चयनित मुद्दों पर बोलने के तरीके पर सवाल उठाया है।
इस पूरे विवाद का केंद्र फिलहाल किसी फिल्मी प्रोजेक्ट से ज्यादा दोनों कलाकारों की सार्वजनिक टिप्पणियां हैं। पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के सामने कई मुद्दे रखे और पूछा कि संवेदनशील घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते समय मुद्दों का दायरा कितना व्यापक होना चाहिए।


