तीन तलाक पर बीजेपी ने शुरु की मुस्लिम महिलाओं की ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’

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केंद्र की मोदी सरकार अपने आखिर संसद सत्र में तीन तलाक बिल को लाने की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी आने वाले लोकसभा चुनाव 2019 में इसे भुनाने में जुट गई है। यूपी में जहां तीन तलाक पीड़िताओं को खोजने और इंसाफ के बहाने जिलों में तीन तलाक प्रमुखों की तैनाती की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड में एक कदम आगे बढ़ते हुए कर्ज और फर्ज का नाम देकर तीन तलाक पीड़िताओं को ब्लैकमेल करने की तैयारी है।

2019 को लेकर बीजेपी राममंदिर और तीन तलाक पर फोकस कर रही है। 2014 में अच्छे दिन और विकास का मुद्दा इसबार पीछे छूट गया है। राममंदिर पर देश भर में चर्चा हो रही है, साधु संतों के साथ केंद्रीय मंत्रियों ने भी सीधे सरकार से मंदिर की मांग शुरु कर दी है। वहीं दूसरी तरफ तीन तलाक को भी मुद्दा बनाने के लिए यूपी और उत्तराखंड में जोरदार तरीके से गोलबंदी की जा रही है।

उत्तराखंड में इस समय निकाय चुनाव हैं, जहां मुस्लिम वोटरों को खास कर महिलाओं को तीन तलाक के अध्यादेश को कर्ज के रूप में बताया जा रहा है। जिसको उतराने के लिए मोदी को वोट देने और कर्ज उतारने के लिए फर्ज बताया जा रहा है।

कर्ज को उतारना हमारा फर्ज

उत्तराखंड बीजेपी प्रवक्ता और अल्पसंख्यक नेता शादाब शम्स ने राजसत्ता एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि..

‘मोदी जी ने तीन तलाक का अध्यादेश और बिल लाकर जो शीतकालीन सत्र में लाया जा रहा है, वो मुस्लिम बहनों पर कर्ज है, जिसको उतराने के लिए तीन तलाक पीड़िताओं के साथ मुस्लिम महिलाओं को उन्हे वोट देकर चुकाना चाहिए। क्योंकि सालों से तीन तलाक के जरिए उनका उत्पीड़न हो रहा है। जिसके लिए मोदी सरकार ने बड़ा काम किया है।’

वोट देकर अहसान उतारना सबसे अच्छा

अब्बास हैदर, यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष

यूपी में भी तीन तलाक पीड़िताओं को साधने के लिए बीजेपी ने अभी से तैयारी शुरु कर दी है। जिसके लिए एक अभियान शुरु किया है। जिसके तहत मुस्लिम बूथों का गठन, मुस्लिम प्रबुध्द जनों का सम्मेलन समेत सभी जिलों में तीन तलाक प्रमुख की नियुक्ति की जा रही है। जिसमें तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष हैदर अब्बास कहते हैं कि

‘मोदी सरकार ने तीन तलाक का अध्यादेश लाकर मुस्लिम महिलाओं पर एहसान किया है। जिसको उतारने के लिए वोट देकर उतारना सबसे अच्छा तरीका होगा। क्योंकि साढ़े चार साल में सरकार ने मुस्लिम विरोधी कोई काम नहीं किया है। बल्कि अल्पसंख्कों के लिए बड़ी संख्या में योजनाएं चलाकर अहसान किया है’.

सरकार सिर्फ काम करे, फैसला हमें करने दे

शिया मौलाना यासूब अब्बास

वहीं लखनऊ के जाने माने मौलाना और शिया वक्फ बोर्ड के सदस्य यासूब अब्बास ने कहा इसे गलत ठहराते हुए कहा कि,

‘जो लोग इसपर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं वो गलती कर रहे हैं। सरकार अपना काम करे, जनता उसे देखेगी और उसका हिसाब अपने आप करेगी। फर्ज और कर्ज की बात करना गलत है। ऑल इंडिया मुस्लिम शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तलाक का अधिकार महिलाओं को दिया है। ताकि महिलाओं की सुरक्षा हो। इसी पर बीजेपी ने भी आगे बढ़कर काम किया है। पर वोट के लिए करना गलत है’।

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