योग गुरु बाबा रामदेव और बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में है। गोंडा में एक कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण ने रामदेव के स्वदेशी अभियान और उनके उत्पादों को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन की शुरुआत स्वदेशी के नाम पर हुई थी, वह अब नकली उत्पादों और विदेशी सामान तक पहुंच गया है। इसके साथ ही उन्होंने पुराने विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए ऐसा तंज कसा, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब रामदेव के स्वदेशी अभियान और पतंजलि ब्रांड को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा होती रही है। बृजभूषण ने अपने भाषण में न सिर्फ मौजूदा मुद्दे उठाए, बल्कि पिछले कुछ वर्षों के विवादों का भी हवाला दिया।
“आंदोलन करना है तो इस बार निर्णायक लड़ाई लड़िए”
जिला मुख्यालय के एक कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब बाबा रामदेव के आंदोलन को लेकर सवाल पूछा गया, तो बृजभूषण ने कहा कि शुरुआत में स्वदेशी का मुद्दा उठाना एक उचित पहल थी। उनके मुताबिक, उस समय अभियान का उद्देश्य भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देना था।
हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की बात करने वाले रामदेव आज विदेशी अधोवस्त्र भी बना रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने पिछले विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए तंज कसा कि अगर इस बार आंदोलन करना है, तो “सिंदूर लगाकर और सलवार पहनकर” विरोध करने न आएं, बल्कि एक व्यक्ति की तरह निर्णायक लड़ाई लड़ें।
उनके इस बयान ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं।
नकली घी से लेकर उत्पादों तक, पुराने आरोप फिर दोहराए
बृजभूषण ने अपने भाषण में खाद्य उत्पादों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में नकली घी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं और इसके लिए उन्होंने रामदेव को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अच्छी सेहत के लिए शुद्ध दूध और घी का सेवन करना चाहिए। उनके मुताबिक, कई लोग गाय या भैंस न पाल पाने की वजह से बाजार के उत्पादों पर निर्भर हो गए हैं।
यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने पतंजलि के उत्पादों पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी वह सार्वजनिक मंचों से ऐसे आरोप लगा चुके हैं।
2022 में भी उठाए थे ‘पतंजलि’ नाम पर सवाल
बृजभूषण शरण सिंह ने याद दिलाया कि 24 नवंबर 2022 को बाराबंकी के एक धार्मिक कार्यक्रम में भी उन्होंने रामदेव और पतंजलि पर इसी तरह की टिप्पणी की थी। उस समय उन्होंने मांग की थी कि बाबा रामदेव और पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर बालकृष्ण अपने ब्रांड के लिए “पतंजलि” नाम का इस्तेमाल बंद करें।
उन्होंने आरोप लगाया था कि गोंडा, जिसे वह महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली बताते हैं, वहां उनके नाम पर कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया गया। उनके मुताबिक, ब्रांड के नाम का उपयोग करने के बावजूद उस क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त योगदान नहीं दिया गया।
पुराने विवादों की पृष्ठभूमि में फिर गरमाई बहस
रामदेव और बृजभूषण के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं। 2023 में जब महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, तब बाबा रामदेव ने उन खिलाड़ियों का समर्थन किया था और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी।
अब एक बार फिर दोनों के नाम सार्वजनिक बहस के केंद्र में हैं। फिलहाल यह मामला बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन इससे स्वदेशी अभियान, ब्रांडिंग और सार्वजनिक दावों को लेकर नई चर्चा जरूर तेज हो गई है।



