ओडिशा की राजनीति में एक और बड़ा उथल-पुथल आ गया है। बीजू जनता दल के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने सोमवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। नवीन पटनायक के करीबी माने जाने वाले सामंतराय का यह कदम बीजेडी के लिए एक और बड़ा झटका है। सूत्रों के मुताबिक, वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
यह घटनाक्रम उन लाखों ओडिशा वासियों के लिए महत्वपूर्ण है जो राज्य की स्थिर राजनीति और विकास को लेकर चिंतित रहते हैं। एक वरिष्ठ नेता का जाना न सिर्फ पार्टी संगठन को कमजोर करता है, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
इस्तीफे में नवीन पटनायक पर साधा निशाना
देबाशीष सामंतराय ने नवीन पटनायक को लिखे इस्तीफा पत्र में कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के हित में निष्ठा से काम किया, लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें योजनाबद्ध तरीके से नजरअंदाज किया जा रहा था। उन्होंने लिखा कि अब पार्टी को उनकी सेवाओं की कोई जरूरत नहीं रह गई है।
सामंतराय 2009 और 2014 में विधायक चुने गए थे। अप्रैल 2024 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। उन्होंने नवीन पटनायक का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें कटक जिले के लोगों की सेवा करने और ओडिशा के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मौका मिला। लेकिन अब उन्हें लगता है कि पार्टी के अंदर उनका भविष्य नहीं बचा है।
वीके पांडियन पर खुला हमला, कई मुद्दों पर नाराजगी
सामंतराय ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीजेडी की चुनावी हार और संगठन के कमजोर होने की मुख्य वजह वीके पांडियन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक एक गैर-राजनेता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उनकी नाराजगी की वजहों में वक्फ बिल पर पार्टी का रुख, संगठन में पांडियन का बढ़ता प्रभाव, नवीन पटनायक से बार-बार मुलाकात न हो पाना, युवा नेताओं को तरजीह और राज्यसभा टिकट जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पहले सुजीत कुमार और ममता महंता भी बीजेडी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
ओडिशा राजनीति में बदलाव की बयार
देबाशीष सामंतराय नौकरशाह से राजनेता बने हैं। उन्होंने नवंबर 2025 में पार्टी के वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। उनका यह कदम बीजेडी के लगातार कमजोर हो रहे संगठन को और उजागर करता है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सामंतराय का अगला कदम बीजेपी की ओर होगा। उन्होंने खुद कहा है कि एक राजनेता के रूप में उनके पास विकल्प खुले हैं और जल्द ही फैसला सार्वजनिक होगा।
यह इस्तीफा ओडिशा में सत्ता बदलाव के बाद बीजेडी के पतन की कहानी को और मजबूत करता है। आम ओडिशा निवासी अब देख रहे हैं कि राज्य की राजनीति किस दिशा में जाती है। मजबूत विपक्ष की जरूरत हर लोकतंत्र में होती है, लेकिन जब सत्ताधारी पार्टी के ही बड़े नेता निरंतर टूट रहे हों तो यह चिंता का विषय बन जाता है।


