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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ‘Dr Nimo Yadav’ और ‘Nehr Who’ अकाउंट बहाल, लेकिन विवादित ट्वीट्स पर रोक जारी

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Rajsatta Express
-
April 6, 2026
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    दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ‘Dr Nimo Yadav’ और ‘Nehr Who’ अकाउंट बहाल, लेकिन विवादित ट्वीट्स पर रोक जारी

    सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अहम मामले में Delhi High Court ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस Purushaindra Kumar Kaurav ने ‘Dr Nimo Yadav’ और ‘Nehr Who’ नाम के X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया। ये अकाउंट क्रमशः प्रवीक शर्मा और कुमार नयन द्वारा संचालित किए जा रहे थे, जिन्हें केंद्र सरकार के निर्देश पर ब्लॉक कर दिया गया था।

    पूरी राहत नहीं: कुछ ट्वीट्स फिलहाल रहेंगे ब्लॉक

    कोर्ट ने साफ किया कि पूरे अकाउंट को बहाल किया जाएगा, लेकिन जिन पोस्ट को आपत्तिजनक बताया गया है, वे अभी अस्थायी रूप से ब्लॉक रहेंगे। इसका मतलब यह है कि अकाउंट चलाने वाले यूजर दोबारा सक्रिय हो सकेंगे, लेकिन विवादित कंटेंट पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

    कानूनी प्रक्रिया पर सवाल, ‘नेचुरल जस्टिस’ पर जोर

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील Vrinda Grover ने दलील दी कि बिना नोटिस और सुनवाई का मौका दिए पूरा अकाउंट ब्लॉक करना गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले कार्रवाई की और बाद में जवाब देने का मौका दिया, जो कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया कि आगे की प्रक्रिया में “प्राकृतिक न्याय” (natural justice) के सिद्धांतों का पालन जरूरी होगा।

    सरकार का पक्ष: IT Act के तहत कार्रवाई सही

    केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल Chetan Sharma ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को Review Committee के सामने पेश होने का मौका दिया गया है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि यह कार्रवाई Section 69A IT Act के तहत की गई, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के मामलों में कंटेंट ब्लॉक करने की अनुमति देता है।

    Review Committee के सामने पेश होने का निर्देश

    कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता Ministry of Electronics and Information Technology की Review Committee के सामने पेश हों। वहां यह तय किया जाएगा कि जिन ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है, वे कानून के तहत सही हैं या नहीं। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

    सोशल मीडिया बनाम सरकारी नियंत्रण, बहस फिर तेज

    यह मामला केवल दो अकाउंट्स तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल फिर उठ गया है कि क्या सरकार पूरे अकाउंट को ब्लॉक कर सकती है या सिर्फ आपत्तिजनक कंटेंट को हटाना चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट हुआ कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई करते समय पारदर्शिता और प्रक्रिया का पालन कितना जरूरी है।

    आगे क्या? अंतिम फैसला Review Committee पर निर्भर

    फिलहाल, अकाउंट्स बहाल हो चुके हैं, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब Review Committee की सुनवाई तय करेगी कि कौन-सा कंटेंट स्थायी रूप से हटेगा और क्या आगे कोई कार्रवाई होगी। यह फैसला आने वाले समय में सोशल मीडिया नियमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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