मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दो भारतीय झंडे वाले LPG टैंकर—Green Asha और Green Sanvi—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं और देश की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब Strait of Hormuz में युद्ध जैसे हालात के कारण शिपिंग लगभग ठप पड़ गई थी। इन टैंकरों के निकलने से भारत में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
तीसरा जहाज अभी फंसा, धीरे-धीरे निकल रहा फंसा हुआ माल
जहाजों की ट्रैकिंग से पता चला है कि एक अन्य भारतीय जहाज Jag Vikram अभी भी स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में मौजूद है। हालांकि, भारत धीरे-धीरे अपने फंसे हुए LPG कार्गो को बाहर निकाल रहा है। इससे पहले Shivalik, Nanda Devi, Pine Gas, Jag Vasant, BW Elm और BW Tyr जैसे जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। अब तक कुल आठ भारतीय LPG टैंकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पार कर चुके हैं।
युद्ध का असर: शिपिंग लगभग ठप, ईरान की शर्तें लागू
Iran और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर इस क्षेत्र की शिपिंग पर साफ दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि अधिकांश जहाजों की आवाजाही रुक गई है। हालांकि ईरान ने कहा है कि “गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज” उसकी अनुमति और समन्वय के साथ इस रास्ते से गुजर सकते हैं। यही वजह है कि भारत जैसे देशों को अपने जहाज निकालने के लिए सावधानी और कूटनीति दोनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
भारत पर असर: दशकों का सबसे बड़ा LPG संकट
भारत इस समय दशकों के सबसे बड़े गैस संकट से जूझ रहा है। देश में LPG की खपत पिछले साल करीब 33.15 मिलियन टन रही, जिसमें से लगभग 60% आयात पर निर्भरता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आयातों का करीब 90% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।
सरकार का कदम: घरेलू जरूरत को प्राथमिकता
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने उद्योगों को मिलने वाली गैस की आपूर्ति कम कर दी है, ताकि घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की कमी न हो। साथ ही, भारत अपने खाली जहाजों में LPG लोड कराकर तेजी से देश लाने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या? बाजार और आम जनता दोनों की नजर
अब सभी की नजर इस बात पर है कि बाकी फंसे हुए जहाज कब तक सुरक्षित निकल पाते हैं। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर LPG की कीमतों और उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, Green Asha और Green Sanvi का सुरक्षित निकलना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

