Delhi Jal Board Case: सत्येंद्र जैन समेत 5 आरोपी 3 सितंबर तक जेल, ₹1,946 करोड़ टेंडर मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश

Delhi Jal Board Case: सत्येंद्र जैन समेत 5 आरोपी 3 सितंबर तक जेल, ₹1,946 करोड़ टेंडर मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश

दिल्ली जल बोर्ड के करीब ₹1,946 करोड़ के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं मामले के एक अन्य आरोपी अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की जांच एजेंसी की मांग स्वीकार कर ली गई।

अदालत के आदेश के मुताबिक सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा अब 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे। सभी आरोपियों को उसी दिन सुबह 11 बजे दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।

किस आरोपी की कब होगी अगली सुनवाई?

राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय की ओर से उनकी जमानत अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि वह एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं और यदि हिरासत लंबी चली तो उनके खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।

कोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए जांच अधिकारी को जमानत अर्जी पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। उदित प्रकाश की जमानत पर 20 अगस्त दोपहर 12 बजे सुनवाई होगी और वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होंगे।

दूसरी ओर, सत्येंद्र जैन समेत बाकी चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत ने एसीबी (ACB) से जवाब मांगा है। इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

अंकित श्रीवास्तव को क्यों मिली पुलिस रिमांड?

मामले के आरोपी कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव को अदालत ने दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

एसीबी का कहना है कि जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की बरामदगी और कथित साजिश से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि पूछताछ सीसीटीवी निगरानी वाले स्थान पर की जाए और आरोपी का नियमित मेडिकल परीक्षण भी कराया जाए।

उसे 21 अगस्त दोपहर 2 बजे फिर से अदालत में पेश किया जाएगा।

क्या है ₹1,946 करोड़ का दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामला?

यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए जारी किए गए करीब ₹1,946 करोड़ के टेंडर से जुड़ा है।

विजिलेंस विभाग की रिपोर्ट के आधार पर एसीबी ने 10 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके।

एसीबी के अनुसार, तकनीकी पात्रता की शर्तों को सीमित किया गया, पानी की गुणवत्ता से जुड़े कुछ जरूरी मानकों को हटाया गया और रोहिणी एसटीपी की क्षमता 15 एमजीडी से बढ़ाकर 30 एमजीडी कर दी गई। एजेंसी का दावा है कि इन बदलावों से करीब ₹123 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय नुकसान हुआ।

जांच में कुछ आरोपियों और Euroteck से जुड़े लोगों के बीच कथित वित्तीय लेनदेन और व्हाट्सएप बातचीत के साक्ष्य मिलने का भी दावा किया गया है।

गिरफ्तारी पर क्या बोले आरोपी?

सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने अदालत में कहा कि एफआईआर दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद गिरफ्तारी की गई है। उनका तर्क था कि सभी आरोपी जांच में लगातार सहयोग करते रहे हैं और मामले से जुड़े अधिकांश दस्तावेज पहले ही एजेंसी के कब्जे में हैं, इसलिए हिरासत की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि अदालत ने इस स्तर पर गिरफ्तारी को अवैध या अनुचित मानने से इनकार कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जमानत याचिकाओं पर अलग से सुनवाई होगी और फिलहाल उस पर कोई अंतिम राय नहीं दी जा रही है।

अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगली सुनवाईयों पर नजर रहेगी, जहां अदालत जमानत अर्जियों और जांच एजेंसी के जवाबों पर आगे का फैसला करेगी।