दिल्ली नगर निगम (MCD) की सियासत में इस बार भी एकतरफा मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने लगातार दूसरे साल मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए जीत का रास्ता लगभग साफ हो गया है। 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग अब औपचारिकता जैसी दिख रही है।
AAP का फैसला: रणनीति या मजबूरी?
दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद AAP अब MCD में भी कमजोर स्थिति में नजर आ रही है। पार्टी के नेता अंकुश नारंग का कहना है कि संख्याबल जुटाने की कोशिश की जा सकती थी, लेकिन पार्टी ने “हॉर्स ट्रेडिंग” से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
पार्टी का तर्क है कि दूसरे दलों की तरह जोड़-तोड़ की राजनीति करने से बेहतर है कि साफ-सुथरी राजनीति पर टिके रहें। हालांकि, इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि AAP फिलहाल अपने संसाधनों और रणनीति को अन्य राज्यों—जैसे पंजाब, गुजरात और गोवा—के चुनावों पर केंद्रित कर रही है।
BJP को सीधा फायदा, कांग्रेस मैदान में
AAP के चुनाव से बाहर रहने का सीधा लाभ BJP को मिलता दिख रहा है। पार्टी पहले ही मजबूत स्थिति में है और अब बिना बड़े मुकाबले के मेयर और डिप्टी मेयर पद हासिल कर सकती है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की है और दोनों पदों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। हालांकि, मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस की राह आसान नहीं मानी जा रही।
वोटों का गणित क्या कहता है
MCD के कुल 250 पार्षदों में BJP के पास 123 और AAP के पास 100 सदस्य हैं। इसके अलावा, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 15, कांग्रेस के 9 और अन्य मिलाकर कुछ सीटें हैं।
मेयर चुनाव में सांसद और विधायक भी वोट करते हैं, जिससे BJP का आंकड़ा 141 तक पहुंच जाता है, जबकि AAP के पास करीब 106 वोट हैं। ऐसे में मुकाबला पहले से ही असंतुलित था, और AAP के बाहर होने से यह पूरी तरह एकतरफा हो गया है।
स्टैंडिंग कमिटी पर AAP की नजर
हालांकि AAP ने मेयर और डिप्टी मेयर पदों से दूरी बनाई है, लेकिन पार्टी ने स्टैंडिंग कमिटी की एक सीट पर उम्मीदवार उतारा है। शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी को मैदान में उतारा गया है।
पार्टी को उम्मीद है कि इस सीट पर जीत हासिल की जा सकती है, जिससे MCD की कार्यप्रणाली में कुछ प्रभाव बनाए रखा जा सके।
दिल्ली की स्थानीय राजनीति में यह फैसला कई सवाल खड़े करता है। क्या यह AAP की लंबी रणनीति का हिस्सा है या मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के चलते लिया गया व्यावहारिक कदम? फिलहाल इतना साफ है कि इस बार MCD में सत्ता संतुलन BJP के पक्ष में और मजबूत होता दिख रहा है, जिसका असर सीधे तौर पर शहर के प्रशासन और फैसलों पर पड़ सकता है।


