देश की राजनीति में एक बार फिर परिसीमन बिल 2026 (Delimitation Bill 2026) को लेकर हलचल तेज हो गई है। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस बिल का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत गलत तरीके से जुटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ इस मुद्दे पर एकजुट होकर संसद के भीतर सरकार का विरोध करेगा।
परिसीमन बिल पर कांग्रेस का रुख साफ, महिलाओं के आरक्षण पर रखी यह शर्त
गुरुवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में परिसीमन बिल का विरोध करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के लगातार संपर्क में है।
हालांकि कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या में ही एक-तिहाई महिलाओं को आरक्षण देने का प्रस्ताव आता है, तो पार्टी उसका समर्थन करने के लिए तैयार है। कांग्रेस का मानना है कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाना अनिवार्य नहीं है।
‘दो-तिहाई बहुमत नहीं, बल्कि कलंकित बहुमत होगा’
जयराम रमेश ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के जरिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, लोकसभा में इतनी राजनीतिक तोड़फोड़ के बाद भी भाजपा के पास संविधान संशोधन के लिए जरूरी संख्या नहीं है।
उन्होंने कहा कि मीडिया में लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि सरकार आसानी से दो-तिहाई बहुमत जुटा लेगी, लेकिन कांग्रेस इस दावे को पूरी तरह खारिज करती है। उनका कहना था कि यदि इस तरह बहुमत हासिल भी होता है, तो वह लोकतांत्रिक दृष्टि से “कलंकित बहुमत” माना जाएगा।
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर डीएमके, आम आदमी पार्टी और उन सभी दलों से बातचीत जारी है, जिन्होंने पहले भी विपक्षी एकजुटता का समर्थन किया था।
मानसून सत्र में कई बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि मानसून सत्र केवल परिसीमन बिल तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी दोहराएगी। जयराम रमेश ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा लगातार उठाया जाएगा और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने चंदा वसूली, एथेनॉल से जुड़े कथित मामलों, अमेरिका के साथ समझौतों और विदेश नीति जैसे विषयों को भी संसद में उठाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन पर बनने वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट चाहे जैसी हो, कांग्रेस सिद्धांत के स्तर पर उसका विरोध जारी रखेगी क्योंकि पार्टी इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ मानती है।
इस दौरान उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने परिसीमन के समर्थन को कुछ शर्तों से जोड़ा था। जयराम रमेश ने कहा कि इस विषय पर आई कई खबरों का खुद सुप्रिया सुले ने भी खंडन किया है।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र, विपक्ष की रणनीति पर रहेगी नजर
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। सत्र शुरू होने से पहले रविवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जबकि सोमवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में साफ है कि परिसीमन बिल और संविधान संशोधन से जुड़े मुद्दे आगामी सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन सकते हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार संसद में इस विधेयक को किस रणनीति के साथ आगे बढ़ाती है और विपक्ष अपनी एकजुटता कितनी मजबूती से बनाए रख पाता है। मानसून सत्र में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।


