शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान भक्त व्रत रखने, मंदिरों में दर्शन करने और घरों में विशेष पूजा करने के साथ दुर्गा चालीसा का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मां दुर्गा की स्तुति करने से मन को शांति मिलती है और भक्त आध्यात्मिक रूप से खुद को मजबूत महसूस करते हैं। अगर आप भी नवरात्रि में रोजाना दुर्गा चालीसा पढ़ना चाहते हैं, तो यहां जानिए इसका महत्व, पाठ करने का सही समय, जरूरी नियम और संपूर्ण पाठ।
नवरात्रि में दुर्गा चालीसा पढ़ना क्यों माना जाता है शुभ?
दुर्गा चालीसा मां दुर्गा की शक्ति, महिमा और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का वर्णन करने वाला प्रसिद्ध भक्तिपाठ है। इसकी शुरुआत इन पंक्तियों से होती है— ‘नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी।’
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना और घटस्थापना से पर्व की शुरुआत होती है। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इन दिनों नियमित रूप से दुर्गा चालीसा पढ़ना शुभ माना जाता है। भक्त मां से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और जीवन में आने वाली परेशानियों से निपटने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।
दुर्गा चालीसा के पाठ का उद्देश्य केवल मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करना ही नहीं, बल्कि मन को शांत रखना और अपनी आस्था को मजबूत करना भी है। हालांकि, इससे किसी विशेष इच्छा के निश्चित रूप से पूरा होने की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
दुर्गा चालीसा का पाठ कब और कैसे करें?
नवरात्रि में दुर्गा चालीसा का पाठ सुबह या शाम, अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है। पूजा के लिए किसी विशेष समय का पालन करना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। नियमितता और श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है।
पाठ करने से पहले इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:
-
स्नान और स्वच्छता: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को व्यवस्थित करें।
-
दीपक जलाएं: मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने अपनी परंपरा के अनुसार दीपक जलाएं।
-
माता का स्मरण करें: कुछ समय शांत बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करें और अपनी प्रार्थना अर्पित करें।
-
चालीसा का पाठ करें: एकाग्र मन से दुर्गा चालीसा पढ़ें। चाहें तो इसके बाद दुर्गा आरती भी कर सकते हैं।
-
भोग अर्पित करें: अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार फल, मिठाई या अन्य सात्विक भोग चढ़ाएं।
अगर आप नौ दिनों तक नियमित पाठ का संकल्प लेते हैं, तो अपनी दिनचर्या के अनुसार एक निश्चित समय तय कर सकते हैं। इससे पूजा में नियमितता बनाए रखना आसान होगा।
Durga Chalisa Full Path: यहां पढ़ें संपूर्ण दुर्गा चालीसा
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए यहां दुर्गा चालीसा का संपूर्ण पाठ दिया गया है। आप इसे सुबह या शाम की पूजा के दौरान पढ़ सकते हैं।
श्री दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुँलोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नरनारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
मोह मदादिक सब बिनशावें॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला॥
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
दोहा
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक॥
पाठ के बाद करें ये काम, पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
दुर्गा चालीसा का पाठ पूरा होने के बाद मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करके परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं।
नवरात्रि के दौरान कुछ भक्त दुर्गा चालीसा के साथ दुर्गा सप्तशती, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का पाठ भी करते हैं। आप अपनी आस्था, समय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इनमें से किसी पाठ को चुन सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा-पाठ को अपनी सुविधा के अनुसार करें। यदि किसी दिन समय की कमी हो, तो स्वयं पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय शांत मन से माता का स्मरण भी कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य धार्मिक जानकारी उपलब्ध कराना है, किसी विशेष फल की गारंटी देना नहीं।



