उत्तर प्रदेश में किसानों से धान खरीद और फसल का भुगतान एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2017 से मार्च 2026 के बीच 80 लाख से अधिक किसानों से 519 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान खरीदा गया। इसके बदले किसानों को ₹1,03,833 करोड़ से अधिक का सीधा भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार की कोशिश है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और उन्हें बिचौलियों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार बीज, सिंचाई, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सरकारी योजनाओं के जरिए किसानों को राहत देने पर काम कर रही है। सरकार के इन दावों के बीच धान खरीद और भुगतान के आंकड़े कृषि क्षेत्र में उसकी नीतियों का अहम हिस्सा बनकर सामने आए हैं।
80 लाख किसानों से धान खरीद, खाते में पहुंचे ₹1.03 लाख करोड़ से ज्यादा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान खरीद के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से मार्च 2026 तक उत्तर प्रदेश में 80 लाख से अधिक किसानों से धान खरीदा गया। इस दौरान खरीद की कुल मात्रा 519 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा रही। किसानों को इसके बदले ₹1,03,833 करोड़ से अधिक का भुगतान सीधे किया गया।
सरकार के मुताबिक, सीधे भुगतान की व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का पैसा समय पर उपलब्ध कराना और बिचौलियों पर निर्भरता कम करना है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन पर खर्च होता है। ऐसे में फसल बेचने के बाद भुगतान में देरी होने पर किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से सरकारी खरीद और भुगतान की व्यवस्था किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, ये आंकड़े सरकार की ओर से बताए गए हैं। किसानों को वास्तविक स्तर पर कितना लाभ मिला, इसका आकलन भुगतान की समयबद्धता, खरीद केंद्रों की उपलब्धता और किसानों की पहुंच जैसे पहलुओं से भी किया जा सकता है।
धान के MSP में ₹71 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी, किसानों को क्या फायदा?
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार भी धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में ₹71 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। MSP वह निर्धारित कीमत है, जिस पर सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत पात्र किसानों से उनकी उपज खरीदी जाती है।
MSP में बढ़ोतरी से किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। इसका फायदा कितना होगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि किसान कितनी मात्रा में सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेच पाते हैं और उन्हें किस दर पर भुगतान मिलता है।
धान उत्पादक किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया का आसान होना भी उतना ही जरूरी है। खरीद केंद्रों तक पहुंच, फसल की गुणवत्ता से जुड़े मानक और भुगतान में लगने वाला समय उनकी कमाई को प्रभावित कर सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों की मेहनत का सम्मान करना और उन्हें उपज का उचित मूल्य दिलाना है। उन्होंने किसान कल्याण को प्रदेश की आर्थिक मजबूती से भी जोड़ा।
खेती से लेकर सिंचाई तक, सरकार ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लंबे समय से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया गया है। उनके मुताबिक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को खेती के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में काम हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान करीब 21 प्रतिशत है। साथ ही, प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत होने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दूध, गन्ना और गेहूं के उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। इन क्षेत्रों को प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय के लिए अहम माना जाता है।
कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने के साथ सिंचाई, बाजार तक पहुंच और फसल का उचित मूल्य मिलना भी महत्वपूर्ण है। किसानों की आर्थिक स्थिति केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि खेती की लागत और बिक्री से मिलने वाली कमाई भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है।
किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सरकार का जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले किसान कर्ज, आर्थिक तंगी और बिचौलियों पर निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझते थे। उनके मुताबिक, अब किसानों को उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाओं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), MSP और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं के जरिए किसानों को खेती से जुड़े संसाधन और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि DBT के जरिए योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है।
किसानों की स्थिति बेहतर होने का असर ग्रामीण बाजार, कृषि आधारित कारोबार और स्थानीय रोजगार पर भी पड़ सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचे और खरीद व भुगतान की प्रक्रिया प्रभावी बनी रहे।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ने धान खरीद, भुगतान, MSP और कृषि विकास से जुड़े आंकड़ों के जरिए किसान कल्याण को सरकार की प्राथमिकता बताया है। अब इन पहलों का वास्तविक असर किसानों की आय, खेती की लागत और बाजार में उनकी स्थिति के आधार पर भी देखा जाएगा।

