ED @70: 81,422 करोड़ की संपत्ति अटैच, क्रिप्टो-फ्रॉड से आतंकी फंडिंग तक नई चुनौतियों पर सख्त नजर

ED @70: 81,422 करोड़ की संपत्ति अटैच, क्रिप्टो-फ्रॉड से आतंकी फंडिंग तक नई चुनौतियों पर सख्त नजर

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर एक साफ संदेश दिया—आर्थिक अपराध बदल रहे हैं, और जांच एजेंसियों को उससे तेज चलना होगा। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में ईडी निदेशक राहुल नवीन ने एजेंसी की उपलब्धियों, बढ़ती चुनौतियों और आगे की रणनीति पर विस्तार से बात की। मंच पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नवीन के मुताबिक, अब फोकस सिर्फ पारंपरिक बैंक फ्रॉड या रियल एस्टेट घोटालों तक सीमित नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े फर्जीवाड़े, साइबर अपराध, ड्रग्स तस्करी और आतंकी फंडिंग जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि जांच के तौर-तरीकों में तकनीकी अपग्रेड और डेटा-ड्रिवन अप्रोच पर जोर दिया गया है।

बदलता अपराध, बदलती जांच—अब टेक्नोलॉजी पर जोर

ईडी प्रमुख ने बताया कि आर्थिक अपराधों का पैटर्न अब बहु-देशीय नेटवर्क, शेल कंपनियों और डिजिटल लेनदेन के जरिए संचालित होता है। ऐसे मामलों में पैसे का ट्रेल पकड़ना आसान नहीं होता। इसी चुनौती को देखते हुए एजेंसी ने अपनी जांच प्रणाली को मजबूत किया है। डेटा एनालिटिक्स, इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाया गया है, ताकि जटिल मामलों में भी साक्ष्य जुटाना संभव हो सके।

आंकड़ों में बढ़ती कार्रवाई—चार्जशीट और अटैचमेंट में उछाल

वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने PMLA के तहत 812 अभियोजन शिकायतें दाखिल कीं, जिनमें 155 सप्लीमेंट्री चार्जशीट शामिल हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी है। संपत्ति अटैचमेंट के मोर्चे पर भी बड़ी छलांग दिखी। पिछले वित्त वर्ष में 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जो साल-दर-साल आधार पर करीब 170% ज्यादा है। अब तक कुल अटैचमेंट 2.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। निदेशक के अनुसार, एजेंसी का लक्ष्य सिर्फ आरोप तय करना नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति को सिस्टम से बाहर करना है।

94% दोषसिद्धि का दावा, पीड़ितों को राहत भी

ईडी ने अपनी दोषसिद्धि दर 94% बताई है। ट्रायल कोर्ट में 2400 से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें बड़ी संख्या में सजा की उम्मीद जताई गई है। एक अहम पहलू पीड़ितों को राहत पहुंचाने का भी है। 2019 में PMLA में हुए संशोधनों के बाद अब ट्रायल के दौरान ही संपत्ति लौटाने की प्रक्रिया आसान हुई है। इसके तहत अब तक 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों को वापस दिलाए गए हैं। PACL और उदयपुर रियल एस्टेट जैसे मामलों में हजारों लोगों को राहत मिली है।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून और ग्लोबल रोल

भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून (FEOA) के तहत 31 मार्च 2026 तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें से 21 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। इस कानून के तहत 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की भूमिका बढ़ी है। देश अब एशिया-पैसिफिक एसेट रिकवरी नेटवर्क की स्टीयरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है और 2026 में इसकी वार्षिक बैठक की मेजबानी करेगा। कुल मिलाकर, ईडी की रणनीति अब स्पष्ट है—तेजी से बदलते आर्थिक अपराधों के बीच तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कड़ी कानूनी कार्रवाई के जरिए सिस्टम को सुरक्षित रखना। आम लोगों के लिए इसका मतलब है कि वित्तीय धोखाधड़ी और काले धन के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी, और पीड़ितों तक पैसा वापस पहुंचाने की कोशिश भी जारी रहेगी।