भारत में नागरिकता से जुड़े नियमों में सरकार ने अहम बदलाव किए हैं, जिनका सीधा असर प्रवासी भारतीयों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन लागू करते हुए कई प्रक्रियाओं को डिजिटल बना दिया है। साथ ही, नाबालिग बच्चों के लिए एक सख्त प्रावधान जोड़ा गया है, जो पासपोर्ट रखने से जुड़ा है। यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब सरकार प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। नए नियमों का मकसद आवेदन प्रक्रिया को तेज करना और कागजी झंझट को कम करना बताया जा रहा है।
नाबालिगों के लिए नया नियम: दो पासपोर्ट नहीं रख सकेंगे
संशोधित नियमों के मुताबिक, अब कोई भी नाबालिग बच्चा एक साथ भारतीय पासपोर्ट और किसी दूसरे देश का पासपोर्ट नहीं रख सकेगा। यह प्रावधान खास तौर पर उन परिवारों को प्रभावित करेगा, जिनके बच्चे दो देशों से जुड़े होते हैं। सरकार का यह कदम नागरिकता से जुड़े नियमों को स्पष्ट और सख्त बनाने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे पहले इस तरह की स्थिति पर स्पष्टता कम थी, लेकिन अब इसे नियमों में सीधे शामिल कर दिया गया है।
OCI प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन, कागजी काम कम
नए नियमों के तहत ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दिया गया है। अब ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन करना हो या उसे सरेंडर करना हो, सब कुछ ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होगा। इसके साथ ही, डुप्लिकेट दस्तावेज जमा करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। यानी अब आवेदकों को बार-बार कागज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने ई-ओसीआई की व्यवस्था भी शुरू की है, जिसमें डिजिटल रजिस्ट्रेशन को मान्यता दी जाएगी।
कार्ड लौटाना जरूरी, नहीं तो भी होगा रद्द
अगर कोई व्यक्ति अपना ओसीआई स्टेटस छोड़ता है, तो उसे अपना कार्ड संबंधित भारतीय मिशन, पोस्ट या एफआरआरओ के पास जमा करना होगा। इसी तरह, अगर सरकार किसी का ओसीआई दर्जा रद्द करती है, तब भी कार्ड लौटाना अनिवार्य रहेगा। हालांकि, अगर कार्ड जमा नहीं किया जाता, तो भी सरकार अपने रिकॉर्ड में उसे रद्द कर सकती है, खासकर ई-ओसीआई मामलों में।
रिव्यू का नया अधिकार: फैसले को चुनौती दे सकेंगे
एक और अहम बदलाव यह है कि अगर किसी का ओसीआई या नागरिकता आवेदन खारिज होता है, तो अब उसे चुनौती देने का विकल्प मिलेगा। ऐसे मामलों की समीक्षा अब उसी अधिकारी से ऊपर के स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
क्या है OCI योजना और कौन कर सकता है आवेदन
ओसीआई योजना 2005 में लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय मूल के लोगों को भारत से जोड़कर रखना है। इसके तहत वे लोग आवेदन कर सकते हैं, जो 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक रहे हों या नागरिकता के पात्र रहे हों। हालांकि, पाकिस्तान या बांग्लादेश से जुड़े लोग इस योजना के दायरे में नहीं आते। कुल मिलाकर, ये बदलाव नागरिकता प्रक्रिया को आधुनिक और स्पष्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। खासकर डिजिटल सिस्टम से आम लोगों को सुविधा मिलेगी, लेकिन कुछ नए नियमों के चलते सावधानी बरतना भी जरूरी होगा।


