दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव के दौरान हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। एक ओर चुनाव में कथित गड़बड़ी के आरोप हैं, तो दूसरी ओर कॉलेज परिसर में जबरन प्रवेश को लेकर सुरक्षा और नियमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र राजनीति और कैंपस प्रशासन दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
चुनाव के बीच उठा विवाद, आरोपों से शुरू हुआ मामला
शुक्रवार को गार्गी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव के दौरान कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव लड़ रही एक उम्मीदवार ने इस संबंध में डूसू अध्यक्ष आर्यन मान को फोन कर शिकायत की।
इसके बाद स्थिति तेजी से बदली। डूसू अध्यक्ष और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े कुछ सदस्य कॉलेज पहुंच गए। उनका कहना था कि वे उम्मीदवार की शिकायत के आधार पर स्थिति देखने आए हैं।
गेट पर रोक, फिर ‘जबरन एंट्री’ का आरोप
गार्गी कॉलेज एक गर्ल्स कॉलेज है, जहां पुरुषों के प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम हैं। ऐसे में जब आर्यन मान और उनके साथियों ने प्रवेश की कोशिश की, तो उन्हें गेट पर रोक दिया गया।
हालांकि, आरोप है कि रोक के बावजूद वे परिसर में घुस गए। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और छात्राओं के बीच असहजता का माहौल बना। कुछ छात्राओं ने इस घटना को डरावना बताया और कहा कि इस तरह की एंट्री कॉलेज के नियमों और सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, AAP का हमला
इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या यह छात्र राजनीति के नाम पर सही व्यवहार है। साथ ही, इसे छात्राओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा।
वहीं एबीवीपी की ओर से कहा गया कि वे केवल एक छात्रा की शिकायत पर वहां पहुंचे थे। संगठन के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान एक कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने के बाद स्थिति बिगड़ी और कार्यकर्ताओं ने अंदर जाने का फैसला लिया।
पुलिस की एंट्री, मामला शांत लेकिन सवाल कायम
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। डूसू अध्यक्ष और उनके साथियों को कैंपस से बाहर किया गया। इस दौरान कुछ छात्राओं ने विरोध में नारेबाजी भी की।
पुलिस के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो गई और अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
यह मामला केवल एक कॉलेज के चुनाव तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल उठता है कि छात्र राजनीति की सीमाएं क्या होनी चाहिए और कैंपस में सुरक्षा नियमों का पालन किस हद तक जरूरी है। खासकर गर्ल्स कॉलेज जैसे संस्थानों में इस तरह की घटनाएं संवेदनशीलता की मांग करती हैं।


