अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक चैनल सक्रिय हैं, तो दूसरी ओर जमीनी हालात तनावपूर्ण हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी भी वार्ता की तारीख तय नहीं है, और वह बातचीत के साथ-साथ हर सैन्य स्थिति के लिए भी तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में पहले से तनाव बना हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
वार्ता पर ब्रेक: ‘अभी कोई तारीख तय नहीं’
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादह ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत को लेकर कोई निश्चित कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका की ओर से “अतिवादी मांगें” रखी जाती हैं, तो उन्हें स्वीकार करना संभव नहीं होगा।
यह बयान उन अटकलों के बीच आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि जल्द ही इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है। हालांकि अब यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस योजना नहीं है।
‘दुश्मन पर भरोसा नहीं’: संसद अध्यक्ष का सख्त संदेश
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, स्थिति इतनी संवेदनशील है कि किसी भी समय संघर्ष शुरू हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं और बातचीत के चलते सुरक्षा तैयारियों में कोई कमी नहीं आई है। उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान कूटनीति और सैन्य तैयारी दोनों को समानांतर चला रहा है।
पृष्ठभूमि: युद्ध, युद्धविराम और अधूरी बातचीत
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमले के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी थी। इन हमलों में हजारों लोगों की मौत हुई। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई।
इस दौरान इस्लामाबाद में हुई बातचीत भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। हालांकि आधिकारिक तौर पर दुश्मनी दोबारा शुरू करने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी ने तनाव को बरकरार रखा है।
यूरोपीय संघ पर भी नाराजगी
ईरान ने इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ को भी निशाने पर लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर यूरोपीय संघ की अपील को “पाखंड” करार दिया।
दरअसल, यूरोपीय संघ ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए इस मार्ग से जहाजों की निर्बाध आवाजाही की मांग की थी। लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए अपने रुख पर कायम रहने का संकेत दिया है।
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ कूटनीति का मुद्दा नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम रास्ता है, और यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार और आम उपभोक्ताओं पर असर डाल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस टकराव की दिशा पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

