ज्ञानवापी विवाद में नहीं बनी सहमति, DLSA की बैठक बेनतीजा; अब अदालत के फैसले पर टिकीं निगाहें

ज्ञानवापी विवाद में नहीं बनी सहमति, DLSA की बैठक बेनतीजा; अब अदालत के फैसले पर टिकीं निगाहें

वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) में दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौते के उद्देश्य से बैठक आयोजित की गई। कई दौर की बातचीत के बावजूद किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। बैठक के बाद वादी और प्रतिवादी, दोनों पक्षों ने साफ कहा कि अब इस मामले का अंतिम समाधान केवल न्यायालय के फैसले से ही संभव है। ऐसे में वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील विवाद पर अब एक बार फिर अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई बैठक, लेकिन नहीं निकला कोई समाधान

ज्ञानवापी विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना तलाशने के लिए वाराणसी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में यह बैठक आयोजित की गई थी। इसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ता और संबंधित पक्षकार मौजूद रहे। उद्देश्य यह था कि यदि आपसी सहमति बन जाए तो लंबे समय से चल रहे विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।

हालांकि, लंबी चर्चा के बावजूद कोई साझा रास्ता नहीं निकल सका। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि किसी भी बिंदु पर सहमति नहीं बन पाई और अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही आगे बढ़ेगा।

दोनों पक्षों ने जताया अदालत पर भरोसा

वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ वार्ता में हिस्सा लिया, लेकिन बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा कानूनी तथ्यों के आधार पर जो भी फैसला सुनाएगी, उसे स्वीकार किया जाएगा।

वहीं, प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता रईस अहमद ने भी माना कि बैठक बेनतीजा रही। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के अपने-अपने कानूनी और तथ्यात्मक तर्क हैं, जिन्हें अदालत के समक्ष रखा जा रहा है। उनके अनुसार, इस संवेदनशील मामले का समाधान न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है और उनका पक्ष आगे भी अदालत में अपने तर्क प्रस्तुत करता रहेगा।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम, शांतिपूर्ण माहौल में पूरी हुई बैठक

ज्ञानवापी विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे समय तैनात रहीं और परिसर में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई।

प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि बैठक पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो। बैठक के दौरान या उसके बाद किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट की मंशा थी कि यदि दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से किसी साझा समाधान पर पहुंच जाएं तो लंबे समय से लंबित इस विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा संभव हो सकता है। हालांकि, सोमवार की बैठक में ऐसा नहीं हो पाया।

अब इस मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय में होगी, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और कानूनी दलीलें पेश करेंगे। अदालत की आगामी कार्यवाही और उसके निर्णय पर ही इस बहुचर्चित विवाद की दिशा निर्भर करेगी। फिलहाल, सुलह की कोशिश भले ही सफल नहीं हुई हो, लेकिन दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया है कि वे न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं और अदालत के अंतिम निर्णय का सम्मान करेंगे।