उत्तर प्रदेश के हापुड़ के बदनौली गांव में गोलीबारी के बाद दलित युवक दीपक की मौत ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद गोलीबारी और पथराव हुआ था। इसमें दीपक समेत कई लोग घायल हुए थे। इलाज के दौरान दीपक की मौत के बाद गांव में तनाव बढ़ गया। मामला अब राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने घटना पर सवाल उठाते हुए आरोपियों को कानूनी सजा दिलाने और पीड़ित परिवार की मदद की मांग की है।
मायावती ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपसी रंजिश का हिंसा और खून-खराबे में बदल जाना चिंताजनक है। उन्होंने सरकार से ऐसी घटनाओं को समय रहते रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की। साथ ही पीड़ित परिवार को सहायता देने की बात भी कही।
गोलीबारी में तीन घायल, इलाज के दौरान दीपक की मौत
बदनौली गांव में शुक्रवार को विवाद के बाद जाट और दलित पक्ष के लोगों के बीच गोलीबारी और पथराव हुआ था। गोली लगने से तीन लोग घायल हुए थे, जबकि पथराव में चार लोगों को चोटें आई थीं।
इन्हीं घायलों में दलित युवक दीपक भी शामिल था। उसकी हालत गंभीर होने के बाद उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। रविवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
दीपक की मौत की खबर सामने आते ही गांव में तनाव बढ़ गया। पुलिस और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब स्थिति को नियंत्रण में रखना और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाना है।
पांच गिरफ्तार, 33 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधान संदीप सिंह समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दूसरी ओर, दलित पक्ष की ओर से 33 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।
मामले में दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
दीपक की मौत के बाद पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ा दी गई है। गांव में कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात है। बदनौली जाने वाले रास्तों पर बैरियर लगाए गए हैं और लोगों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है।
गांव में तनाव, बैरियर हटाने को लेकर पुलिस से नोकझोंक
दीपक की मौत के बाद विभिन्न संगठनों के लोगों के गांव पहुंचने की सूचना के बीच पुलिस ने निगरानी और बढ़ा दी। इसी दौरान गांव की तरफ जा रहे बाइक सवार कुछ युवकों की ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से नोकझोंक की जानकारी सामने आई।
कुछ युवकों द्वारा पुलिस बैरियर हटाकर गांव की ओर जाने का प्रयास किए जाने की भी बात सामने आई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
फिलहाल प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है। गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि घटना के बाद तनाव और न बढ़े।
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल, तीन दिन में देनी होगी SIT रिपोर्ट
इस पूरे मामले में सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों की जांच के लिए एडीजी के निर्देश पर SIT गठित की गई है।
SIT यह देखेगी कि विवाद से पहले पुलिस को क्या जानकारी थी और सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या कदम उठाए। टीम घटना स्थल पर पुलिस के पहुंचने में किसी तरह की देरी हुई या नहीं, इसकी भी पड़ताल करेगी। इसके अलावा घायलों को इलाज उपलब्ध कराने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह भी जांच का हिस्सा होगा।
SIT को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। ऐसे में अब एक तरफ पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी ओर SIT की रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि घटना से पहले और बाद में पुलिस की कार्रवाई कैसी रही।
इस बीच मायावती की प्रतिक्रिया ने मामले को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बसपा प्रमुख ने सरकार से आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पीड़ित परिवार की सहायता की मांग की है। फिलहाल गांव में तनाव बना हुआ है और प्रशासन दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
बदनौली गोलीकांड में अब आगे की दिशा पुलिस जांच, गिरफ्तारियों और SIT की रिपोर्ट से तय होगी। खास तौर पर तीन दिन में आने वाली SIT रिपोर्ट पर नजर रहेगी, क्योंकि इसी के जरिए पुलिस की भूमिका को लेकर उठे सवालों की जांच आगे बढ़ेगी।


