प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में विकसित भारत 2047 के विजन को नई दिशा देते हुए देश के सामने कई महत्वाकांक्षी आर्थिक और तकनीकी लक्ष्य रखे। उन्होंने कहा कि अगले दो दशकों में भारत को ऐसी अर्थव्यवस्था बनना होगा, जहां दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की सूची में भारतीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी हो, देश का एक बैंक वैश्विक टॉप-5 में पहुंचे और ऊर्जा से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक भारत अग्रणी भूमिका निभाए।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह केवल सरकारी योजनाओं का रोडमैप नहीं है, बल्कि उद्योग, बैंकिंग, तकनीक, ऊर्जा और युवाओं की भागीदारी के जरिए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का व्यापक खाका है।
Fortune 500 में 50 भारतीय कंपनियां, अभी कहां है भारत?
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य दुनिया की प्रतिष्ठित Fortune Global 500 सूची में 50 भारतीय कंपनियों को पहुंचाना होना चाहिए।
फिलहाल यह लक्ष्य काफी बड़ा दिखाई देता है। वर्ष 2025 की Fortune Global 500 सूची में भारत की केवल 9 कंपनियां शामिल थीं। इनमें Reliance Industries 88वें स्थान पर सबसे आगे रही, जबकि LIC 95वें और Indian Oil 127वें स्थान पर थी।
इसके अलावा SBI, ONGC, HDFC Bank, Tata Motors, BPCL और ICICI Bank भी इस सूची में शामिल रहे।
यानी भारत को मौजूदा स्थिति से पांच गुना से ज्यादा बढ़ोतरी करके 50 कंपनियों तक पहुंचना होगा।
भारतीय बैंक को दुनिया के टॉप-5 में पहुंचाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने बैंकिंग सेक्टर के लिए भी बड़ा लक्ष्य तय किया। उन्होंने कहा कि भारत का कम से कम एक बैंक दुनिया के टॉप-5 सबसे बड़े बैंकों में शामिल होना चाहिए।
अप्रैल 2026 की S&P Global Market Intelligence रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर चीन का Industrial and Commercial Bank of China (ICBC) रहा। उसके बाद भी शीर्ष सूची में चीन के बड़े बैंक ही शामिल हैं।
भारत का सबसे बड़ा बैंक State Bank of India (SBI) अभी इस सूची में काफी पीछे है। ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र के आकार, पूंजी और वैश्विक कारोबार में उल्लेखनीय विस्तार की जरूरत होगी।
100GW परमाणु ऊर्जा और सेमीकंडक्टर पर बड़ा दांव
ऊर्जा सुरक्षा को विकसित भारत की अहम जरूरत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
31 जुलाई 2026 तक देश की न्यूक्लियर क्षमता लगभग 8.78GW थी। सरकार इसे 2031-32 तक 22.38GW और फिर 2047 तक 100GW तक ले जाना चाहती है।
इसका मतलब है कि मौजूदा क्षमता की तुलना में करीब 11 गुना विस्तार करना होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की योजना है।
इसी के साथ भारत सेमीकंडक्टर निर्माण को भी नई गति देना चाहता है। अगले 7 से 8 वर्षों में 5 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 13 अगस्त तक देश के छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता है। इनमें से तीन परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
AI में एक करोड़ युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा की।
सरकार पहले से IndiaAI Mission के तहत YUVA AI for All कार्यक्रम चला रही है। यह पहल 11 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और लोगों को AI की बुनियादी समझ देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, 8 जुलाई तक इस कार्यक्रम में 85.27 लाख लोगों का पंजीकरण हो चुका था।
विकसित भारत का रोडमैप किस दिशा में इशारा करता है?
प्रधानमंत्री के भाषण से यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भारत का फोकस केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा। लक्ष्य वैश्विक कंपनियां तैयार करने, मजबूत बैंकिंग प्रणाली बनाने, स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करने और तकनीक आधारित रोजगार बढ़ाने पर रहेगा।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उद्योग, सरकार और युवाओं की संयुक्त भूमिका अहम मानी जा रही है। अगर ये योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।



