अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, 6 महीने में आयात 281% बढ़ा, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी क्यों घटी?

अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, 6 महीने में आयात 281% बढ़ा, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी क्यों घटी?

भारत की रसोई गैस सप्लाई में पिछले छह महीनों में बड़ा बदलाव आया है। पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच अमेरिका भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 53 फीसदी हो गई। छह महीने पहले यानी सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान यह हिस्सेदारी सिर्फ 7.9 फीसदी थी।

यानी कुछ ही महीनों में भारत के LPG आयात का रुख अमेरिका की तरफ तेजी से मुड़ा है। दूसरी ओर, जिन खाड़ी देशों पर भारत लंबे समय से LPG सप्लाई के लिए काफी हद तक निर्भर रहा है, उनकी हिस्सेदारी में तेज गिरावट आई है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को माना जा रहा है, जो पश्चिम एशिया से भारत तक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम समुद्री रास्ता है।

होर्मुज संकट ने बदला भारत का LPG आयात

भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा करता है। सामान्य परिस्थितियों में देश के लगभग 90 फीसदी LPG आयात पश्चिम एशिया से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आते हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर युद्ध के कारण आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा।

स्थिति बदलते ही भारतीय खरीदारों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर देखना पड़ा। इसी दौरान अमेरिका से LPG की खरीद तेजी से बढ़ी। इसका असर आयात के आंकड़ों में साफ नजर आता है।

केप्लर के शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत ने कुल 71.4 लाख टन LPG आयात की। यह पिछले छह महीने की अवधि की तुलना में 43.1 फीसदी कम है। लेकिन इसी अवधि में अमेरिका से LPG आयात में जोरदार उछाल आया।

कुल आयात घटा, फिर भी अमेरिका से खरीद 281% बढ़ी

आंकड़ों की सबसे दिलचस्प बात यही है कि भारत का कुल LPG आयात कम हुआ, लेकिन अमेरिका से आने वाली गैस की मात्रा कई गुना बढ़ गई।

मार्च-अगस्त 2026 के दौरान अमेरिका से भारत का LPG आयात 281.1 फीसदी बढ़कर 37.8 लाख टन पहुंच गया। कुल आयात में अमेरिकी हिस्सेदारी भी 7.9 फीसदी से बढ़कर 53 फीसदी हो गई।

इसका मतलब यह है कि भारत ने केवल ज्यादा LPG खरीदने के बजाय अपने सप्लाई नेटवर्क में भी बड़ा बदलाव किया। जहां पहले पश्चिम एशियाई देशों की भूमिका ज्यादा थी, वहीं अब अमेरिकी सप्लाई ने उस हिस्से को काफी हद तक भरना शुरू किया है।

आम उपभोक्ता के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि LPG की सप्लाई सीधे घरेलू रसोई से जुड़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई रूट में बदलाव होने पर आगे चलकर आयात लागत और घरेलू बाजार की परिस्थितियों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, दिए गए आंकड़े फिलहाल मुख्य रूप से आयात स्रोतों में बदलाव को दिखाते हैं।

UAE, कतर और कुवैत की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट

युद्ध से पहले भारत के LPG आयात में UAE सबसे बड़ा स्रोत था। सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान भारत के कुल LPG आयात में UAE की हिस्सेदारी 37.8 फीसदी थी। मार्च-अगस्त 2026 में यह घटकर सिर्फ 13.4 फीसदी रह गई।

कतर की स्थिति भी बदली है। उसकी हिस्सेदारी 21.1 फीसदी से घटकर 5.7 फीसदी रह गई। इसी तरह कुवैत की हिस्सेदारी 15.1 फीसदी से घटकर 4.9 फीसदी हो गई।

सऊदी अरब से भी भारत के LPG आयात का हिस्सा कम हुआ। छह महीने पहले जहां उसकी हिस्सेदारी 14.1 फीसदी थी, वहीं मार्च-अगस्त की अवधि में यह घटकर 5.9 फीसदी रह गई।

यानी एक तरफ अमेरिका का हिस्सा तेजी से बढ़ा है, तो दूसरी तरफ प्रमुख खाड़ी देशों की संयुक्त पकड़ कमजोर हुई है। यह बदलाव केवल किसी एक देश के साथ व्यापार बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि संकट के बीच भारत की ऊर्जा सप्लाई व्यवस्था के तेजी से बदलने का संकेत भी देता है।

भारत के लिए बदला हुआ सप्लाई मैप कितना अहम?

भारत के LPG आयात का यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में युद्ध ने पारंपरिक ऊर्जा सप्लाई रूट पर दबाव बढ़ाया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत को देखते हुए वहां किसी भी तरह की बाधा का असर उन देशों पर पड़ सकता है जो इस रास्ते से ऊर्जा आयात करते हैं।

मार्च-अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने इस परिस्थिति में अमेरिकी LPG की ओर तेजी से रुख किया। छह महीने में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब सात गुना बढ़ी, जबकि खाड़ी देशों की हिस्सेदारी लगातार नीचे आई।

अब बड़ा सवाल यह है कि यह बदलाव केवल युद्ध और होर्मुज संकट तक सीमित रहता है या भारत के LPG आयात का सप्लाई मैप लंबे समय के लिए बदलता है। फिलहाल इतना साफ है कि पिछले छह महीनों में भारत की रसोई गैस सप्लाई के अंतरराष्ट्रीय स्रोतों में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है।