RBI ने शुरू किए 3 बड़े सर्वे, अब जनता बताएगी महंगाई और खर्च का हाल, 7 अक्टूबर के ब्याज दर फैसले पर नजर

RBI ने शुरू किए 3 बड़े सर्वे, अब जनता बताएगी महंगाई और खर्च का हाल, 7 अक्टूबर के ब्याज दर फैसले पर नजर

महंगाई के आंकड़े सिर्फ सरकारी रिपोर्टों और आर्थिक संकेतकों से नहीं समझी जाती। बाजार में खरीदारी करने वाला परिवार क्या महसूस कर रहा है, उसकी आय और खर्च की स्थिति कैसी है और आने वाले महीनों में उसे कीमतों को लेकर कितनी चिंता है—ये बातें भी अर्थव्यवस्था की दिशा समझने में अहम होती हैं। इसी जमीनी तस्वीर को जानने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तीन बड़े सर्वे शुरू किए हैं।

इन सर्वे के जरिए केंद्रीय बैंक महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदों और उपभोक्ता विश्वास का आकलन करेगा। खास बात यह है कि यह कवायद ऐसे समय हो रही है जब RBI की अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के फैसले 7 अक्टूबर को घोषित होने हैं। यानी ब्याज दरों पर फैसला लेने से पहले RBI आम लोगों की आर्थिक धारणा को भी समझना चाहता है।

महंगाई को लेकर जनता क्या सोच रही है, RBI करेगा पता

पहला सर्वे महंगाई प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH) है। इसमें लोगों से उनकी व्यक्तिगत उपभोग टोकरी के आधार पर कीमतों में बदलाव और महंगाई को लेकर उनकी धारणा जानी जाएगी। यह सर्वे देश के 19 प्रमुख शहरों में किया जा रहा है।

इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, लखनऊ, नागपुर, पटना, रायपुर, रांची और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं।

आम उपभोक्ता के लिए इसका मतलब सीधा है। अगर लोगों को लगता है कि आने वाले समय में खाने-पीने का सामान, रोजमर्रा की जरूरतों या दूसरी चीजों की कीमतें बढ़ेंगी, तो इससे उनकी महंगाई की उम्मीद का संकेत मिलता है। RBI के लिए ऐसी उम्मीदें मौद्रिक नीति तैयार करते समय उपयोगी इनपुट बनती हैं।

शहरों के साथ गांवों की आवाज भी सुनेगा केंद्रीय बैंक

दूसरा सर्वे शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (UCCS) है। इसके तहत शहरी परिवारों से उनकी आर्थिक स्थिति, रोजगार, आय, खर्च और कीमतों को लेकर उनकी राय ली जाएगी।

तीसरा सर्वे ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (RCCS) है। इसकी खासियत इसका बड़ा भौगोलिक दायरा है। यह सर्वे 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में किया जा रहा है।

इससे RBI को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रामीण परिवार मौजूदा आर्थिक स्थिति को किस तरह देख रहे हैं और भविष्य को लेकर उनकी उम्मीदें क्या हैं। ग्रामीण परिवारों की आय और खर्च की धारणा से उनकी क्रय शक्ति का भी अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है।

7 अक्टूबर के फैसले से पहले क्यों अहम हैं ये आंकड़े?

RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) जब ब्याज दरों पर फैसला करती है, तो उसके सामने महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई आंकड़े होते हैं। लेकिन केवल आधिकारिक आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं बताते। उपभोक्ताओं की सोच और उनका खर्च करने का रुझान भी अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति का संकेत देता है।

यही वजह है कि इन तीनों सर्वे के नतीजे आगामी मौद्रिक नीति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को जब RBI अपनी अगली नीति समीक्षा के फैसले घोषित करेगा, तब इन सर्वेक्षणों से मिले संकेत भी नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

ब्याज दरों का असर आम लोगों की जिंदगी पर सीधे पड़ता है। दरों में बदलाव का संबंध कर्ज की लागत और आर्थिक गतिविधियों से होता है। ऐसे में RBI के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि परिवार महंगाई और अपनी आर्थिक स्थिति को किस नजर से देख रहे हैं।

कंपनियों से लेकर ग्रामीण बाजार तक, सबकी नजर

इन सर्वेक्षणों का महत्व केवल RBI तक सीमित नहीं है। इनके नतीजे कारोबार और वित्तीय बाजारों के लिए भी संकेत दे सकते हैं।

अगर शहरी और ग्रामीण परिवार अपनी आय तथा खर्च को लेकर सकारात्मक नजर आते हैं, तो रिटेल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में मांग को लेकर उम्मीद मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से मिलने वाले आंकड़े कंपनियों को इन बाजारों में अपनी बिक्री और कारोबारी रणनीति तैयार करने में मदद कर सकते हैं।

इस लिहाज से RBI के ये तीन सर्वे अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों की नब्ज पकड़ने की कोशिश हैं। 19 शहरों और 31 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण-अर्धशहरी क्षेत्रों से मिलने वाली प्रतिक्रियाएं बताएंगी कि उपभोक्ता आज अपनी आर्थिक स्थिति को कैसे देख रहा है और भविष्य को लेकर कितना भरोसा रखता है।

अब सबसे ज्यादा नजर 7 अक्टूबर की मौद्रिक नीति घोषणा पर रहेगी। उससे पहले RBI द्वारा जुटाए जा रहे ये जमीनी संकेत यह समझने में अहम होंगे कि महंगाई की धारणा और उपभोक्ता भरोसा किस दिशा में जा रहा है।