भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरे टी20 मुकाबले में रनों की ऐसी बरसात हुई कि टीम इंडिया के 249 रन भी जीत की गारंटी नहीं बन सके। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा किया, लेकिन वेस्टइंडीज ने कप्तान शे होप की विस्फोटक शतकीय पारी के दम पर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस मुकाबले में दोनों टीमों ने मिलकर 501 रन बनाए। नतीजा सिर्फ भारतीय टीम की हार तक सीमित नहीं रहा। मैच के बाद हेड कोच गौतम गंभीर ने रांची की सपाट पिच पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्रिकेट में केवल चौके-छक्के नहीं, बल्कि बल्ले और गेंद के बीच बराबरी की टक्कर भी जरूरी है। उन्होंने गेंदबाजों के करियर और उनकी मेहनत का जिक्र करते हुए बेहतर पिच तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।
249 रन भी नहीं बचा पाई टीम इंडिया, वेस्टइंडीज ने कैसे पलटा मैच?
दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 249 रन बनाए। इतने बड़े स्कोर के बाद टीम इंडिया को मजबूत स्थिति में माना जा रहा था। लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।
मेहमान टीम ने पारी के पहले ही ओवर में दो विकेट गंवा दिए थे। इसके बावजूद कप्तान शे होप ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक जड़ा और अपनी टीम को जीत की राह पर बनाए रखा।
वेस्टइंडीज ने 18.3 ओवर में 252 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस तरह भारतीय टीम का विशाल स्कोर भी काम नहीं आया और मैच में गेंदबाजों के लिए मुश्किलें साफ नजर आईं।
दोनों टीमों के बीच 40 ओवर से भी कम के खेल में कुल 501 रन बने। यह आंकड़ा मुकाबले की हाई-स्कोरिंग प्रकृति को दिखाता है। दर्शकों को खूब चौके-छक्के देखने को मिले, लेकिन भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर के लिए यह प्रदर्शन पिच के व्यवहार पर सवाल उठाने की वजह बन गया।
गौतम गंभीर ने क्यों उठाया पिच का मुद्दा? गेंदबाजों के करियर की दिलाई याद
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौतम गंभीर ने कहा कि क्रिकेट का असली आकर्षण बल्ले और गेंद के बीच बराबरी की प्रतिस्पर्धा में है। उनके मुताबिक, अगर पिच पर बल्लेबाजों को लगातार आसानी मिलती रहे और गेंदबाजों के पास वापसी का मौका कम हो जाए, तो मुकाबले का संतुलन बिगड़ सकता है।
गंभीर ने कहा कि दर्शक अगर केवल चौके और छक्के देखना चाहते हैं, तो टीम भी ऐसा क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है। लेकिन अगर लोगों को संतुलित मुकाबला चाहिए, तो पिच पर गेंदबाजों को भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलना चाहिए।
उन्होंने गेंदबाजों की मेहनत का जिक्र करते हुए कहा कि ये खिलाड़ी कड़ी मेहनत करके भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम तक पहुंचे हैं। उनके करियर भी दांव पर लगे हैं। इसलिए जरूरी है कि पिच ऐसी हो, जहां बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले।
गंभीर की इस टिप्पणी के पीछे पिच की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल है। टी20 क्रिकेट में बड़े स्कोर दर्शकों का मनोरंजन करते हैं, लेकिन अगर गेंदबाज लगातार महंगे साबित हों और उन्हें विकेट लेने के पर्याप्त मौके न मिलें, तो खेल का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
पहली बार नहीं उठाया सवाल, इससे पहले भी पिच से नाखुश थे गंभीर
रांची के मुकाबले के बाद गौतम गंभीर ने जिस तरह पिच पर अपनी राय रखी, वह इस सीरीज में पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी वह बल्लेबाजों के लिए बेहद अनुकूल पिचों को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं।
इससे पहले दूसरे वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 405 रन बनाए थे। जवाब में भारतीय टीम ने शुभमन गिल की दोहरे शतक वाली पारी के दम पर 406 रन का लक्ष्य हासिल किया था। भारत ने यह लक्ष्य आठ विकेट शेष रहते पूरा कर लिया था।
इतने बड़े स्कोर और रिकॉर्ड चेज के बावजूद गंभीर पिच के व्यवहार से संतुष्ट नहीं थे। अब दूसरे टी20 में 501 रन बनने के बाद उन्होंने एक बार फिर इसी मुद्दे को उठाया है।
लगातार ऐसे मुकाबलों के बाद पिच तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि, केवल एक मैच के स्कोर से पिच की गुणवत्ता का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए पिच के व्यवहार, गेंदबाजों को मिलने वाली मदद और मैच की परिस्थितियों को भी देखना जरूरी होता है।
टी20 सीरीज 1-1 से बराबर, अब तीसरे मैच पर नजर
वेस्टइंडीज की जीत के बाद पांच मैचों की टी20 सीरीज 1-1 से बराबर हो गई है। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को खेला जाना है। इस मैच में जीत दर्ज करने वाली टीम सीरीज में बढ़त हासिल कर लेगी।
भारतीय टीम के लिए अगले मुकाबले में गेंदबाजी की रणनीति अहम रहने वाली है। वहीं, पिच के व्यवहार को लेकर गंभीर की टिप्पणी के बाद यह देखना भी दिलचस्प होगा कि आगे के मैचों में गेंदबाजों को कितनी मदद मिलती है।
क्रिकेट में बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी का अपना आकर्षण है। लेकिन एक रोमांचक मुकाबला वही माना जाता है, जिसमें बल्लेबाजों के शानदार शॉट्स के साथ गेंदबाजों की अच्छी गेंदबाजी भी देखने को मिले।
गंभीर का संदेश भी इसी संतुलन पर केंद्रित है। उनके मुताबिक, क्रिकेट को सिर्फ रनों की दौड़ तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। खेल में बल्लेबाज और गेंदबाज, दोनों को अपनी क्षमता साबित करने का उचित अवसर मिलना जरूरी है।

