अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने महज एक घंटे में सात झूठ बोले। हालांकि गालिबाफ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये झूठ कौन-कौन से थे, लेकिन उनके बयान ने दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत और तनाव को नई दिशा दे दी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय हालात पहले से ही संवेदनशील हैं और ऊर्जा बाजार भी इस टकराव पर नजर बनाए हुए हैं।
ट्रंप के दावों पर ईरान का कड़ा विरोध
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। इस दावे को ईरान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत खारिज कर दिया।
गालिबाफ ने कहा कि इस तरह के “फर्जी दावे” न तो युद्ध में कोई बढ़त दिला सकते हैं और न ही बातचीत को सार्थक बना सकते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी से भरोसा कमजोर होता है और समाधान की संभावना और दूर चली जाती है।
मीडिया और दबाव की राजनीति पर आरोप
ईरान के स्पीकर ने अमेरिका पर यह आरोप भी लगाया कि वह मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए वैश्विक धारणा को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना था कि इसका असर ईरान की जनता पर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी नाकेबंदी जारी रखता है, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त कदम उठा सकता है। गालिबाफ के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के नियमों और अनुमति का पालन करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की ऊर्जा नस पर दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। ऐसे में इस मार्ग को लेकर कोई भी अनिश्चितता सीधे तौर पर तेल और गैस की कीमतों को प्रभावित करती है।
हाल ही में ईरान ने संकेत दिया था कि वह इस मार्ग को फिर से खोल रहा है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इसे हमेशा के लिए खुला रखने की कोई गारंटी नहीं है। इसके विपरीत, ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने इसे स्थायी रूप से खुला रखने पर सहमति दे दी है।
तनाव का वैश्विक असर: ऊर्जा बाजार पर नजर
पिछले महीने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात और बिगड़ गए थे। जवाब में ईरान ने होर्मुज मार्ग को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई।
तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई और कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति सीमित करनी पड़ी। कुछ जगहों पर तो आपातकाल जैसे हालात भी बन गए थे।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी और रणनीतिक टकराव का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर हर नई जानकारी बेहद अहम रहने वाली है।


