केंद्र सरकार अब छोटे-मोटे अपराधों से जुड़े लंबित मामलों को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सभी विभागों से कहा है कि वे ऐसे मामलों की समीक्षा करें और जहां संभव हो, कोर्ट से केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करें। यह कदम हाल ही में पास हुए जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 के बाद उठाया गया है।
5 करोड़ केस खत्म करने की तैयारी
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार:
- देश में करीब 5 करोड़ मामले छोटे अपराधों से जुड़े हैं
- इनमें से अधिकतर मामलों को कोर्ट तक पहुंचना ही नहीं चाहिए था
सरकार चाहती है कि नए कानून के तहत इन मामलों को बंद कर राहत दी जाए।
क्या बदला नए कानून में?
इस बिल के जरिए 79 केंद्रीय कानूनों की 784 धाराओं में संशोधन किया गया है और करीब 1000 छोटे अपराधों को डिक्रिमिनलाइज किया गया है।
मुख्य बदलाव:
- 57 प्रावधानों में जेल की सजा खत्म
- 158 मामलों में जुर्माना हटाया गया
- 113 मामलों में सजा को सिर्फ पेनल्टी में बदला गया
- 17 मामलों में सजा कम की गई
प्रदूषण और नियमों में भी राहत
नए नियमों के तहत:
- पहली बार एयर पॉल्यूशन नियम तोड़ने पर सिर्फ पेनल्टी
- ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड हो सकता है
- नॉइज पॉल्यूशन में पहली बार सिर्फ चेतावनी
हालांकि बार-बार नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
न्यायपालिका पर बोझ कम करने की कोशिश
सरकार का मानना है कि इस फैसले से अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ काफी कम होगा। DPIIT के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि विभागों को पहले ही ऐसे मामलों की समीक्षा करने की सलाह दी जा चुकी है।
राज्यों को भी दिया संदेश
सरकार ने राज्यों से भी अपील की है कि वे अपने स्तर पर छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करें। अब तक 12 राज्य इस दिशा में कदम उठा चुके हैं।
आम लोगों के लिए क्या मतलब?
- छोटे मामलों में कोर्ट-कचहरी के चक्कर कम होंगे
- अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी
- व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी


