अस्पताल के बेड से देवेंद्र महतो की चिट्ठी, धरना स्थल लौटने की मांगी इजाजत, रघुबर दास ने भी दी भूख हड़ताल की चेतावनी

अस्पताल के बेड से देवेंद्र महतो की चिट्ठी, धरना स्थल लौटने की मांगी इजाजत, रघुबर दास ने भी दी भूख हड़ताल की चेतावनी

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। JLKM नेता देवेंद्र महतो पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और फिलहाल रांची के सदर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इसी बीच उन्होंने अस्पताल के बेड से रांची के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर वापस जाने की अनुमति मांगी है। महतो का कहना है कि उनका शरीर अस्पताल में इलाज करा रहा है, लेकिन उनका संकल्प आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों के साथ है। दूसरी ओर, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की CBI जांच की सिफारिश नहीं की गई, तो वह खुद भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

11 दिन की भूख हड़ताल के बाद अस्पताल में इलाज, फिर धरना स्थल जाने की मांग

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। यह आंदोलन अब 19वें दिन में पहुंच गया है। इसी आंदोलन के समर्थन में JLKM नेता देवेंद्र महतो भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

लगातार 11 दिन तक भूख हड़ताल के बाद उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने आंदोलन से दूरी बनाने के बजाय धरना स्थल पर वापस जाने की इच्छा जताई है।

महतो ने सिविल सर्जन को लिखे पत्र में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जाने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि हजारों छात्र अपने अधिकार और भविष्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और वह इस संघर्ष से खुद को अलग नहीं मानते।

सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए महतो ने कहा कि उनका शरीर अस्पताल के बिस्तर पर है, लेकिन उनकी आत्मा और संकल्प सत्याग्रह स्थल पर है, जहां छात्र और युवा अपने भविष्य के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ी पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?

इस पूरे आंदोलन का केंद्र झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और व्यवस्था में बदलाव की मांग है। छात्र इन मामलों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

आंदोलनकारी चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों और कथित गड़बड़ियों पर गंभीरता से कार्रवाई हो। इसी मांग को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में विरोध प्रदर्शन चल रहा है।

देवेंद्र महतो का अस्पताल से धरना स्थल लौटने की अनुमति मांगना बताता है कि आंदोलन को लेकर नेतृत्व और छात्रों के बीच दबाव कितना बढ़ गया है। हालांकि, उनकी वापसी की अनुमति डॉक्टरों और प्रशासन के स्तर पर क्या तय होती है, यह आगे स्पष्ट होगा।

इस बीच आंदोलन का राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है।

रघुबर दास ने सरकार को दिया एक हफ्ते का अल्टीमेटम

बुधवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता रघुबर दास भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों को सुना।

दास ने राज्य सरकार से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की सिफारिश करने की मांग की। इसके लिए उन्होंने सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है।

उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से कहा कि अगर राज्य सरकार तय समय के भीतर CBI जांच की सिफारिश करने में नाकाम रहती है, तो वह खुद धरना स्थल पर भूख हड़ताल शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

इस बयान के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक दबाव भी बढ़ गया है। अब सरकार के सामने एक तरफ छात्रों का लगातार जारी प्रदर्शन है और दूसरी तरफ विपक्ष की ओर से CBI जांच की मांग तेज हो गई है।

 

अब सरकार के सामने बढ़ती चुनौती

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े इस आंदोलन ने युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। छात्रों के लिए भर्ती परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती। उसके पीछे नौकरी की तैयारी, लंबे समय की मेहनत और करियर की उम्मीद जुड़ी होती है।

यही वजह है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों की नाराजगी लगातार बनी हुई है। फिलहाल देवेंद्र महतो अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, लेकिन धरना स्थल लौटने की अनुमति मांगकर उन्होंने साफ कर दिया है कि आंदोलन से उनका जुड़ाव बना हुआ है।

दूसरी ओर रघुबर दास ने सरकार के सामने एक सप्ताह की समयसीमा रख दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार का रुख इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।

फिलहाल रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। छात्रों की मांग, देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल और अब रघुबर दास की चेतावनी—इन तीनों घटनाक्रमों ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।