कर्नाटक में बिजली महंगी: 1 अप्रैल से प्रति यूनिट 36 पैसे बढ़े, जेब पर पड़ेगा सीधा असर

कर्नाटक में बिजली महंगी: 1 अप्रैल से प्रति यूनिट 36 पैसे बढ़े, जेब पर पड़ेगा सीधा असर

कर्नाटक में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल की शुरुआत महंगी होने जा रही है। 1 अप्रैल से राज्य में प्रति यूनिट 36 पैसे का अतिरिक्त शुल्क लागू होगा। यह बदलाव सीधे तौर पर हर घर और छोटे-बड़े कारोबार की बिजली लागत को प्रभावित करेगा। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी सामान्य टैरिफ संशोधन नहीं, बल्कि पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े खर्चों की वसूली से जुड़ी है।

राज्य विद्युत नियामक आयोग (KERC) के निर्देश के बाद बिजली वितरण कंपनियों (ESCOMs) को यह अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति दी गई है।

क्यों बढ़ा बिजली का बिल? समझिए पूरा गणित

यह बढ़ोतरी ‘पी एंड जी सरचार्ज’ यानी पेंशन और ग्रेच्युटी अंशदान के सरकारी हिस्से की रिकवरी के लिए लागू की गई है। KERC के आदेश के मुताबिक, यह शुल्क सभी उपभोक्ताओं से समान रूप से लिया जाएगा।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह सरचार्ज वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू होगा और 2027-28 तक प्रभावी रह सकता है। आगे के वर्षों में भी इसमें बदलाव तय किया गया है—2026-27 में 35 पैसे और 2027-28 में 34 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त भार पड़ सकता है।

सीधे शब्दों में कहें तो यह सिर्फ एक बार की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि आने वाले समय में भी उपभोक्ताओं के बिल पर असर डालने वाला निर्णय है।

हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ा है मामला

ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने साफ किया है कि यह फैसला सरकार की ओर से सीधे तौर पर टैरिफ बढ़ाने का नहीं है। उनके मुताबिक, यह कदम कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया है।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (KPTCL) और ESCOM कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े मामलों को अदालत के निर्देश पर सुलझाया गया। इसके बाद KERC ने उपभोक्ताओं से इस खर्च की वसूली की अनुमति दी।

जॉर्ज ने यह भी बताया कि इस तरह का प्रस्ताव पहले 2022 में तत्कालीन सरकार ने भी रखा था, लेकिन तब इसे मंजूरी नहीं मिली थी।

राजनीतिक घमासान भी तेज

बिजली दरों में इस बढ़ोतरी को लेकर सियासत भी गरमा गई है। राज्य भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने इसे ‘जनविरोधी फैसला’ बताया है।

उनका आरोप है कि सरकार एक तरफ लोकलुभावन योजनाओं की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों पर महंगाई का बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम सीधे तौर पर जनता की जेब पर असर डालने वाला है।

आम उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा?

बिजली दरों में 36 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी सुनने में भले छोटी लगे, लेकिन लंबे समय में यह घरेलू बजट और छोटे व्यवसायों के खर्च को बढ़ा सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए, जहां बिजली खपत ज्यादा है, मासिक बिल में स्पष्ट अंतर दिखाई देगा।

कुल मिलाकर, यह फैसला तकनीकी और कानूनी कारणों से लिया गया जरूर है, लेकिन इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कोई विकल्प सामने आता है या नहीं।