कोलकाता नगर निगम ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के घर की छत के एक हिस्से को गिराने का आदेश जारी किया है। यह हिस्सा बिना अनुमति के बनाया गया बताया जा रहा है। आम नागरिकों के लिए यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि चाहे कोई कितना बड़ा पद पर रहा हो, नियमों का उल्लंघन होने पर प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। यह मामला संपत्ति नियमों की पालना और जवाबदेही की याद दिलाता है।
नगर निगम ने बेलेघाटा के बदन रॉय लेन स्थित संदीप घोष के घर का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि मूल डिजाइन से हटकर तीन हिस्से बनाए गए हैं, जिनमें से एक को 45 दिनों के अंदर हटाना अनिवार्य है।
बिना अनुमति का निर्माण, क्या-क्या है विवादित?
कोलकाता नगर निगम के अनुसार, संदीप घोष और उनकी पत्नी संगीता घोष पर बिल्डिंग रूल्स 2009 के सेक्शन 133 और 134 का उल्लंघन करने का आरोप है। छत पर 5.425 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी कवरिंग, उसकी 2.05 मीटर ऊंचाई, लोहे की घुमावदार सीढ़ी और तीसरी मंजिल पर बनी ईंट की दीवार बिना अनुमति के बताई गई है।
30 अक्टूबर 2024 को नगर निगम ने नोटिस जारी किया था। सुनवाई में दोनों पक्ष मौजूद थे। संदीप घोष ने दो महीने में हटाने की सहमति दी थी, जिसके बाद नगर निगम ने 45 दिनों का समय देते हुए अंतिम आदेश जारी कर दिया। अगर किसी को आपत्ति हो तो वह फिर से नगर निगम में शिकायत कर सकता है।
संदीप घोष का आरजी कर हॉस्पिटल से जुड़ा विवादित इतिहास
संदीप घोष आरजी कर हॉस्पिटल में फाइनेंशियल करप्शन मामले में जेल की सजा काट रहे हैं। सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था। डॉक्टर के रेप और मर्डर की घटना के समय वे अस्पताल के सुपरिटेंडेंट थे। उस मामले में उनके रोल पर भी सवाल उठे थे, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
रेप-मर्डर मामले में उन्हें बाद में जमानत मिल गई, लेकिन फाइनेंशियल करप्शन के मामले में वे अभी भी जेल में हैं। नगर निगम की यह कार्रवाई एक सरकारी सदस्य की शिकायत पर हुई है, जो इस बात को रेखांकित करती है कि व्यक्तिगत संपत्ति के नियमों की अनदेखी अब आसान नहीं रही।
क्या होगा आगे, 45 दिनों का समय
नगर निगम का यह आदेश साफ संदेश देता है कि अनधिकृत निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर संदीप घोष इस आदेश का पालन नहीं करते तो आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यह पूरा मामला उन हजारों लोगों को प्रभावित करता है जो नियमों का पालन करते हुए घर बनाते हैं। जब बड़े लोग नियम तोड़ते दिखते हैं तो आम आदमी में सरकार और प्रशासन के प्रति भरोसा कम होता है। वहीं, दूसरी तरफ यह भी उम्मीद जगाता है कि कानून सबके लिए समान है।
अभी यह देखना होगा कि संदीप घोष इस आदेश के खिलाफ क्या रणनीति अपनाते हैं। कोलकाता नगर निगम की यह कार्रवाई शहर में अनधिकृत निर्माणों पर हो रही बड़ी मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है।


