कोरोना महामारी भले ही अब पहले जैसी बड़ी चुनौती नहीं रही, लेकिन उसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं। इसी बीच बिहार के भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) के मेडिसिन विभाग की एक रिसर्च ने ‘लॉन्ग कोविड’ को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
अस्पताल के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि पिछले तीन महीनों में जांचे गए 4,800 मरीजों में से 1,000 से अधिक गंभीर मरीजों में लॉन्ग कोविड से जुड़े समान लक्षण पाए गए। हालांकि, यह अध्ययन अस्पताल की ओर से साझा किए गए दावों पर आधारित है और इसके निष्कर्षों की व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि या स्वतंत्र समीक्षा का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया है।
4,800 मरीजों की जांच में क्या सामने आया?
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल, मई और जून के दौरान इलाज के लिए पहुंचे 4,800 मरीजों का क्लीनिकल परीक्षण किया गया। इस दौरान 1,000 से अधिक गंभीर मरीजों में ऐसे लक्षण मिले, जिन्हें डॉक्टरों ने लॉन्ग कोविड से जोड़कर देखा।
डॉ. राजकमल चौधरी के मुताबिक, इन मरीजों के शरीर में कोरोना वायरस के निष्क्रिय अवशेष अभी भी मौजूद हो सकते हैं, जो दिल, फेफड़ों, पेट की परतों और अन्य ऊतकों पर प्रभाव डाल रहे हैं। यह डॉक्टर का दावा है, जिस पर आगे और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता हो सकती है।
वैक्सीन लेने वालों में भी मिले लक्षण
रिसर्च के अनुसार, लॉन्ग कोविड जैसे लक्षण केवल उन लोगों में नहीं मिले जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई थी, बल्कि कुछ ऐसे लोगों में भी पाए गए जिन्होंने कोविड वैक्सीन ली थी।
हालांकि, अध्ययन में यह भी कहा गया कि फिलहाल यह स्थिति जानलेवा नहीं दिखी, लेकिन इससे प्रभावित लोगों में लंबे समय तक कमजोरी, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बनी रह सकती हैं।
क्यों नहीं उतर रहा बुखार?
डॉक्टरों के अनुसार, कई मरीजों में सामान्य दवाओं और एंटीबायोटिक का अपेक्षित असर नहीं दिखा। कुछ मरीजों को ठीक होने में एक महीने या उससे अधिक का समय लगा।
रिपोर्ट में पैरों में जकड़न, नसों में तनाव, लगातार कमजोरी और लंबे समय तक बुखार जैसे लक्षणों का भी उल्लेख किया गया है। डॉ. चौधरी का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है, जो शरीर में मौजूद वायरस के संभावित अवशेषों को पूरी तरह समाप्त कर सके।
सरकार से की अतिरिक्त रिसर्च और बूस्टर पर विचार की अपील
डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि वह वर्ष 2023 से कोविड-19 मरीजों पर लॉन्ग कोविड को लेकर अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने इस विषय पर एक पुस्तक “My First Experiences with COVID-19 Patient” भी प्रकाशित की है।
उन्होंने केंद्र सरकार से देशभर के अस्पतालों में इस विषय पर बड़े स्तर पर शोध कराने की अपील की है। साथ ही, लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए भविष्य में अतिरिक्त बूस्टर वैक्सीन की आवश्यकता पर विचार करने का सुझाव भी दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग कोविड पर दुनिया भर में लगातार शोध जारी है। ऐसे में किसी भी नए निष्कर्ष को व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों और स्वतंत्र समीक्षा के साथ समझना महत्वपूर्ण है।


