पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है, लेकिन इस हार के बाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के तेवर ढीले पड़ने के बजाय और भी तीखे हो गए हैं। ‘दीदी’ ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यह हार जनता का जनादेश नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कम से कम 100 सीटों पर खुलेआम वोटों की लूट हुई है और उनकी लड़ाई सिर्फ किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयोग से थी। एक पत्रकार के तौर पर जब हम इन बयानों को देखते हैं, तो यह साफ नजर आता है कि बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और भी गरमाने वाली है। ममता का यह रुख संकेत दे रहा है कि वे इस हार को इतनी आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं हैं।
“राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी” – ममता का कड़ा रुख
चुनावी नतीजों के बाद आम तौर पर मुख्यमंत्री राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपते हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने इस परंपरा को तोड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह राजभवन नहीं जाएंगी। ममता बनर्जी ने सवाल किया, “मैं राजभवन क्यों जाऊं? अगर मुझे शपथ लेनी होती, तो मैं जाती। उन्होंने तो कब्जा कर लिया है।”
ममता ने स्पष्ट किया कि उनकी जगह सड़कों पर है और वह वहीं रहेंगी। उनका कहना है कि वे पहले भी सड़कों पर उतरकर संघर्ष करती रही हैं और भविष्य में भी जनता के बीच रहकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। उनका यह तेवर बताता है कि तृणमूल कांग्रेस अब एक आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए खुद को तैयार कर रही है।
चुनाव आयोग और ईवीएम पर उठाए गंभीर सवाल
ममता बनर्जी के निशाने पर इस बार सबसे ज्यादा चुनाव आयोग रहा। उन्होंने आयोग पर पूरी तरह से पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया दिल्ली के इशारों पर संचालित हो रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के चरणों के बीच में ही उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और अधिकारियों का तबादला करके अपनी पसंद के ब्यूरोक्रेट्स को तैनात किया गया।
दीदी ने काउंटिंग सेंटर्स के ‘हाईजैक’ होने की बात भी कही। उन्होंने कल के घटनाक्रम को लोकतंत्र का ‘काला इतिहास’ करार दिया। ममता का मानना है कि ईवीएम मशीनों के साथ हेरफेर की गई और यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया ताकि उन्हें जबरदस्ती हराया जा सके।
INDIA गठबंधन की एकजुटता और ‘फाइंडिंग कमेटी’ का गठन
ममता बनर्जी ने इस कठिन समय में विपक्ष की एकजुटता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन जैसे इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने उनसे बात की है और वे उनके साथ खड़े हैं। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी उनसे मिलने पहुंच रहे हैं।
भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए ममता ने घोषणा की कि वे 10 सदस्यों की एक ‘फाइंडिंग कमेटी’ यानी जांच समिति बनाएंगे। यह टीम राज्य के विभिन्न इलाकों का दौरा करेगी और इस बात की पड़ताल करेगी कि कहां और कैसे गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं पर हो रहे कथित अत्याचारों पर भी चिंता जताई और कहा कि उनकी पार्टी ‘बाउंस बैक’ करेगी।
लोकतंत्र की हत्या का आरोप और वैश्विक संदेश
ममता बनर्जी का सबसे बड़ा दर्द यह था कि एक महिला होने के नाते उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बूथों से धक्का मारकर निकाला गया। उन्होंने चेताया कि बंगाल में जो हुआ, वह पूरी दुनिया में गलत संदेश भेज रहा है कि भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं हो रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वे टाइगर की तरह लड़ी हैं और यह लड़ाई थमी नहीं है। उनका मानना है कि केंद्र सरकार केवल एक पार्टी का शासन चाहती है, जिसे वे सफल नहीं होने देंगी।


