नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता की अपील को सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारकर एक मिसाल पेश की है। गुरुवार को नई दिल्ली में उन्होंने कारकेड की जगह मेट्रो ट्रेन से सफर किया और आम नागरिकों के साथ यात्रा करते हुए उनके विचार भी सुने। यह कदम उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है जो रोजाना पेट्रोल-डीजल की महंगाई से जूझ रहे हैं।
प्रधानमंत्री की अपील वैश्विक चुनौतियों के बीच पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की है। मुख्यमंत्री ने इसे तुरंत अमल में लाते हुए दिखाया कि बड़े पद पर बैठे लोग भी आम जीवन शैली अपनाकर देशहित में योगदान दे सकते हैं।
मेट्रो यात्रा और जनता से संवाद
शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन तक की यात्रा के दौरान डॉ. मोहन यादव ने सहयात्रियों से बातचीत की। उन्होंने लोगों के अनुभव जाने और विश्वास व विकास के बीच सामंजस्य पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सभी से अपील की कि प्रधानमंत्री की इस पहल को अपनाएं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करें। उनकी इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
राज्य सरकार की गाइडलाइंस और व्यावहारिक कदम
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री की अपील को लागू करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार की हैं। कैबिनेट बैठकें अब वर्चुअल माध्यम से करने, मंत्रियों और निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने जैसे उपाय शुरू कर दिए गए हैं।
डॉ. मोहन यादव ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर सिर्फ 8 कर दी है। पहले दिन की तुलना में कारकेड की गाड़ियां करीब आधी रह गई हैं। उन्होंने मंत्रियों से भी अपील की है कि वे पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। क्षेत्रीय दौरों के दौरान अब वाहन रैलियां भी नहीं निकाली जाएंगी।
देशहित में बदलाव की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील देश को मजबूत बनाने की दिशा में है। अगर हम जीवनशैली में अनुशासन लाएं तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता से काम कर रही है। छोटे-छोटे बदलावों से बड़ा असर पड़ सकता है। आम नागरिकों के लिए यह संदेश है कि सरकारी प्रयासों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी योगदान देना जरूरी है।
सकारात्मक संकेत
डॉ. मोहन यादव का यह रवैया दिखाता है कि सत्ता में बैठे लोग अगर संयम और मितव्ययिता अपनाएं तो आम जनता में भी जागरूकता बढ़ती है। इस पहल से पेट्रोल-डीजल की बचत के अलावा पर्यावरण को भी फायदा पहुंच सकता है।
अब देखना यह होगा कि अन्य राज्य सरकारें और अधिकारी इस अपील को कितनी गंभीरता से लेते हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश में यह कदम सराहनीय माना जा रहा है और लोगों में सकारात्मक चर्चा छिड़ी हुई है।


