पेट्रोल-डीजल 3 रुपये महंगे: मोदी विदेश दौरे पर, विपक्ष ने लगाया महंगाई का आरोप

पेट्रोल-डीजल 3 रुपये महंगे: मोदी विदेश दौरे पर, विपक्ष ने लगाया महंगाई का आरोप

नई दिल्ली: देश में शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है। इस फैसले ने आम जनता के बजट पर नया बोझ डाल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ठीक उसी दिन पांच दिवसीय विदेश दौरे पर रवाना हुए, जिस दिन यह कीमत वृद्धि लागू हुई। इस संयोग को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

सामान्य परिवारों के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे ट्रांसपोर्ट, किराने और रोजमर्रा की महंगाई से जुड़ी होती हैं। ऐसे में यह बढ़ोतरी घरेलू खर्च को और प्रभावित करेगी।

विपक्ष का तीखा हमला

कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर गए और देश को पेट्रोल-डीजल की महंगाई का तोहफा देकर गए। उन्होंने कहा कि काश चुनाव अभी चल रहे होते तो शायद ये दाम नहीं बढ़ते।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि पहले वोट लूटते हैं, फिर जहां सबसे ज्यादा दर्द होता है, वहीं चोट पहुंचाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या बंगाल सरकार अब पेट्रोल-डीजल पर VAT कम करेगी।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पूछा कि रुपया, डीजल और पेट्रोल में सबसे पहले ‘सेंचुरी’ कौन लगाएगा। कांग्रेस ने आधिकारिक बयान में कहा कि चुनाव खत्म होते ही वसूली शुरू हो गई है।

दूध की कीमतों में भी इजाफा

पेट्रोल-डीजल की बढ़ोतरी से पहले ही देश की दो बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इससे आम आदमी के रसोई बजट पर दोहरी मार पड़ी है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार चुनाव के दौरान कीमतें स्थिर रखती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही महंगाई का बोझ बढ़ा देती है।

आम आदमी पर क्या असर?

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट का खर्च सीधे बढ़ेगा। इससे किराया, सब्जी-फल और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी प्रभावित होंगी। CNG के दाम भी दो रुपये बढ़ाए गए हैं, जिससे ऑटो-टैक्सी वाले और मध्यम वर्गीय परिवार दोनों पर असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की गिरावट के चलते यह बढ़ोतरी आई है, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहा है।

सरकार की ओर से अभी इस बढ़ोतरी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आम नागरिक अब उम्मीद कर रहे हैं कि राज्य सरकारें VAT में कुछ राहत देकर इस बोझ को कम करने की कोशिश करेंगी।

महंगाई का बढ़ता दबाव

यह घटना एक बार फिर महंगाई को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ गई है। आम आदमी के लिए पेट्रोल-डीजल, दूध जैसी बुनियादी चीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी रोजगार और आय के साथ नहीं बढ़ रही है।

विपक्ष इस मौके को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि आम जनता महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।