कैब में महिलाओं की सुरक्षा पर अब सख्ती: ड्राइवर-गाड़ी की होगी दोबारा जांच, रूट बदला तो अलर्ट, 60 सेकेंड में SOS रिस्पॉन्स की सिफारिश

कैब में महिलाओं की सुरक्षा पर अब सख्ती: ड्राइवर-गाड़ी की होगी दोबारा जांच, रूट बदला तो अलर्ट, 60 सेकेंड में SOS रिस्पॉन्स की सिफारिश

एप-बेस्ड कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी से सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अब नियम और सख्त करने की तैयारी है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विस्तृत सुरक्षा गाइडलाइंस जारी की हैं। आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों से इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। खासकर ड्राइवर या वाहन की पहचान में गड़बड़ी, रास्ता बदलने, अनुचित व्यवहार, पीछा करने, असुरक्षित जगह पर उतारने और इमरजेंसी में मदद मिलने में देरी जैसी शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

महिलाओं के लिए कैब बुक करना रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ऐसे में NCW की सिफारिशें सीधे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी हैं। इनमें ड्राइवर की पहचान से लेकर रूट मॉनिटरिंग, SOS रिस्पॉन्स और शिकायतों के निपटारे तक कई स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।

ऐप पर दिख रहा ड्राइवर वही है या नहीं? अब होगा वेरिफिकेशन

NCW ने कहा है कि ऐप पर बुकिंग के समय जो ड्राइवर और वाहन की जानकारी दिखाई जाती है, उसका वास्तविक ड्राइवर और गाड़ी से मिलान होना चाहिए।

अगर कैब में कोई दूसरा ड्राइवर या अलग वाहन पहुंचता है और पहचान मेल नहीं खाती, तो यात्री को बिना कैंसिलेशन चार्ज के राइड रद्द करने की सुविधा देने की सिफारिश की गई है।

ड्राइवरों की पुलिस वेरिफिकेशन और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इतना ही नहीं, केवल एक बार जांच के बजाय समय-समय पर दोबारा सत्यापन की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है।

रात में सफर करने वाली महिलाओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर भी जोर है। इनमें ड्राइवर फोटो वेरिफिकेशन, ड्राइवर के नशे में होने की जांच और यात्री की सहमति से किसी भरोसेमंद संपर्क को राइड की जानकारी स्वतः भेजने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

जहां संभव और व्यावहारिक हो, वहां ऐप में महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है।

रूट बदला तो तुरंत मिलेगा अलर्ट, संदिग्ध मूवमेंट पर नजर

सुरक्षा गाइडलाइंस में राइड के दौरान वाहन की लोकेशन और मूवमेंट पर भी खास ध्यान दिया गया है। NCW ने एग्रीगेटर्स से ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने को कहा है जो तय रूट से किसी बड़े या संदिग्ध विचलन को पहचान सके।

अगर वाहन सामान्य रास्ते से काफी अलग जाता है, तो यात्री और कैब कंपनी दोनों को रियल-टाइम अलर्ट मिलना चाहिए।

इसी तरह, लंबे समय तक वाहन के एक जगह रुके रहने या असामान्य तरीके से इधर-उधर जाने पर भी सुरक्षा जांच शुरू करने की व्यवस्था सुझाई गई है।

रात में अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए सेफ-ड्रॉप व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। ड्राइवर को महिला यात्री को सुनसान, असुरक्षित या अनधिकृत जगह पर उतारने से बचना होगा। सामान्य स्थिति में यात्रा वहीं खत्म होनी चाहिए, जो जगह यात्री ने ऐप पर चुनी है।

60 सेकेंड में SOS का जवाब, हर कैब में फिजिकल बटन की सिफारिश

इमरजेंसी के समय कुछ सेकेंड भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी को देखते हुए NCW ने हर एग्रीगेटर के पास 24×7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर रखने की सिफारिश की है। यह सेंटर SOS और दूसरे इमरजेंसी अलर्ट की निगरानी करेगा।

आयोग ने अतिरिक्त सुरक्षा मानक के तौर पर सुझाव दिया है कि SOS अलर्ट मिलने के 60 सेकेंड के भीतर रिस्पॉन्स दिया जाना चाहिए।

हर कैब में यात्री की आसान पहुंच वाली जगह पर फिजिकल SOS बटन उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी आपात स्थिति में महिला को केवल मोबाइल ऐप पर निर्भर न रहना पड़े।

NCW ने यह भी कहा है कि राज्यों में परिवहन विभाग का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। परिवहन विभाग, RTO, पुलिस और ऐप-बेस्ड मोबिलिटी कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए, ताकि शिकायत आने पर कार्रवाई में देरी न हो।

शिकायत की पुष्टि 2 घंटे में, समाधान के लिए 72 घंटे का सुझाव

महिला यात्रियों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे को लेकर भी NCW ने समयबद्ध व्यवस्था की सिफारिश की है।

दुर्व्यवहार, उत्पीड़न, मारपीट, रूट बदलने, बिना अनुमति ड्राइवर या वाहन बदलने और इमरजेंसी में समय पर मदद नहीं मिलने जैसी शिकायतों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए। सुझाव है कि शिकायत मिलने के 2 घंटे के भीतर उसकी पुष्टि की जाए और सामान्य मामलों में 72 घंटे के भीतर समाधान की कोशिश हो।

गंभीर शिकायतों को पुलिस तक पहुंचाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। साथ ही संबंधित इलेक्ट्रॉनिक सबूत को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई है।

एग्रीगेटर्स को बुकिंग रिकॉर्ड, ड्राइवर और वाहन की जानकारी तथा लोकेशन डेटा जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे। सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की नियमित समीक्षा और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा प्रोटोकॉल और SOP में बदलाव करने की भी सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर, NCW की गाइडलाइंस का फोकस कैब यात्रा के हर चरण को ज्यादा सुरक्षित बनाने पर है—बुकिंग से लेकर ड्रॉप और शिकायत के समाधान तक। अब इन सिफारिशों को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किस तरह लागू किया जाता है, यह अगला महत्वपूर्ण कदम होगा।