नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक विवाद के बाद हो रहे री-एग्जाम को लेकर छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर आई है। बिहार, पंजाब और हरियाणा सरकारों ने परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में आसानी देने के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा की है। 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले इस री-एग्जाम में शामिल 22 लाख छात्रों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है।
परीक्षा के समय ट्रांसपोर्ट की परेशानी अक्सर छात्रों के मनोबल को प्रभावित करती है। ऐसे में राज्य सरकारों का यह कदम युवाओं को बिना किसी चिंता के तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित करने का मौका देगा। आम अभिभावक और छात्र अब थोड़ी राहत की सांस ले सकते हैं।
बिहार सरकार का छात्रवादी फैसला
बिहार सरकार ने सभी नीट उम्मीदवारों के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में पूरी तरह मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्यभर में कहीं भी जाने वाले छात्र बिना किराया दिए बसों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
यह व्यवस्था विशेष रूप से उन छात्रों के लिए फायदेमंद साबित होगी जो दूर-दराज के गांवों या छोटे कस्बों से आते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बोझ कम करने वाला कदम है। छात्रों को बस में चढ़ते समय सिर्फ अपना NEET एडमिट कार्ड और पहचान पत्र दिखाना होगा।
पंजाब और हरियाणा में तीन दिन की छूट
पंजाब सरकार ने 20 जून से 22 जून तक पंजाब रोडवेज की बसों में नीट परीक्षार्थियों को मुफ्त यात्रा की अनुमति दी है। इससे दूरदराज के इलाकों से आने वाले छात्रों को काफी सुविधा मिलेगी।
इसी तरह हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की कि 20 और 21 जून को हरियाणा रोडवेज की बसों में छात्र बिना टिकट के सफर कर सकेंगे। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि कोई भी छात्र परिवहन की समस्या के कारण परीक्षा केंद्र पर समय पर न पहुंच पाने की चिंता में न रहे।
तीनों राज्यों में एक बात समान है — छात्रों को अलग से कोई पास या टिकट नहीं बनवाना पड़ेगा। उनका NEET एडमिट कार्ड ही यात्रा का वैध दस्तावेज माना जाएगा।
पेपर लीक के बाद री-एग्जाम, अब फोकस तैयारी पर
3 मई को हुई मूल नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के कारण रद्द कर दी गई थी। अब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की जा रही है। इस पूरे प्रकरण में छात्रों को दो बार तैयारी का तनाव झेलना पड़ा।
ऐसे में राज्य सरकारों द्वारा दी गई यह सुविधा न सिर्फ व्यावहारिक मदद है बल्कि छात्रों के मनोबल को मजबूत करने वाली भी है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए यह राहत मायने रखती है।
चुनावी साल में राज्य सरकारों का यह कदम युवाओं के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता भी दर्शाता है। उम्मीद है कि अन्य राज्य भी अगर जरूरी समझें तो ऐसी सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
अब सभी छात्रों को चाहिए कि वे शेष समय का बेहतर उपयोग करें और पूरे आत्मविश्वास के साथ 21 जून को परीक्षा में उतरें। यह न सिर्फ उनकी मेहनत का नतीजा होगा बल्कि उनके सपनों की दिशा भी तय करेगा।


