NEET Re-Exam 2026 से पहले मध्य प्रदेश में रेलवे की ओर से किए गए विशेष इंतजाम अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। जिन छात्रों की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने का दावा किया गया था, वही व्यवस्था अब कई अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के लिए नई परेशानी बनती दिख रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए तो स्पेशल ट्रेन उपलब्ध है, लेकिन परीक्षा खत्म होने के बाद घर लौटने के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं की गई है।
ऐसे समय में जब हजारों छात्र पहले ही परीक्षा के दबाव से गुजर रहे हैं, यात्रा से जुड़ी दिक्कतों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की सुविधा, लेकिन वापसी का क्या?
रेलवे ने इंदौर से भोपाल के बीच एक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है, ताकि NEET Re-Exam में शामिल होने वाले छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकें। यह ट्रेन इंदौर से चलकर फतेहाबाद, बडनगर, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, शुजालपुर, सीहोर और संत हिरदाराम नगर जैसे स्टेशनों से होते हुए भोपाल पहुंचती है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त भीड़ को संभालने और छात्रों को राहत देने के लिए यह व्यवस्था की गई है। लेकिन परीक्षा के बाद छात्रों की वापसी के लिए कोई विशेष ट्रेन घोषित नहीं की गई है। ऐसे में कई अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के सामने लौटने की योजना को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।
किराया बना नई चिंता, सामान्य ट्रेनों से काफी ज्यादा शुल्क
यात्रियों की परेशानी सिर्फ वापसी तक सीमित नहीं है। स्पेशल ट्रेन का किराया भी चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन में स्लीपर क्लास का किराया 350 रुपये रखा गया है।
तुलना करें तो इसी रूट पर चलने वाली कई नियमित ट्रेनों में किराया काफी कम है। उदाहरण के तौर पर जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस में स्लीपर टिकट लगभग 150 रुपये और मालवा एक्सप्रेस में करीब 180 रुपये पड़ता है। यानी स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले छात्रों को सामान्य ट्रेनों की तुलना में लगभग दोगुना भुगतान करना पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह भी है कि बीच के कई स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को भी लगभग समान किराया देना पड़ रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
कई जिलों के छात्रों को नहीं मिली सीधी सुविधा
रेलवे की यह विशेष व्यवस्था पूरे क्षेत्र को कवर नहीं करती। नीमच, मंदसौर, जावरा, पिपलिया मंडी और मल्हारगढ़ जैसे इलाकों के छात्रों के लिए कोई सीधी स्पेशल ट्रेन उपलब्ध नहीं है।
इन क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को पहले किसी अन्य स्टेशन तक पहुंचना होगा, फिर वहां से ट्रेन पकड़नी होगी। कई छात्रों को बस या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे यात्रा का खर्च और समय दोनों बढ़ रहे हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध कोच और परिचालन क्षमता को देखते हुए ही ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि छात्रों का एक वर्ग मानता है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर और व्यापक व्यवस्था की जरूरत थी।
री-नीट परीक्षा से पहले बढ़ीं चुनौतियां
इस बार NEET Re-Exam 21 जून को आयोजित किया जा रहा है। पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा दोबारा कराई जा रही है। इसी कारण परीक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है।
भोपाल में जहां पहली परीक्षा में 14,334 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 13,774 रह गई है। परीक्षा केंद्रों की संख्या भी 33 से घटकर 32 रह गई है।
ऐसे में छात्रों और अभिभावकों की उम्मीद थी कि यात्रा व्यवस्था पूरी तरह सुगम होगी। लेकिन स्पेशल ट्रेन की वापसी व्यवस्था और बढ़े हुए किराये को लेकर उठ रहे सवालों ने रेलवे की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है। अब देखने वाली बात होगी कि परीक्षा के बाद लौटने वाले अभ्यर्थियों के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है या नहीं।


