शुभेंदु अधिकारी कांग्रेस में आना चाहते थे? राहुल गांधी के ‘नो वैकेंसी’ वाले जवाब पर नया दावा, बंगाल की राजनीति में हलचल

शुभेंदु अधिकारी कांग्रेस में आना चाहते थे? राहुल गांधी के ‘नो वैकेंसी’ वाले जवाब पर नया दावा, बंगाल की राजनीति में हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा एक दिलचस्प दावा सामने आया है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई ने कहा है कि भाजपा में शामिल होने से पहले शुभेंदु अधिकारी कांग्रेस का हिस्सा बनना चाहते थे। उनके मुताबिक, उस दौर में शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के भीतर खुद को असहज महसूस कर रहे थे और पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज थे। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क साधा था। हालांकि, यह दावा पत्रकार का है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों, विपक्षी गठबंधनों और नेतृत्व की भूमिका पर नई बहस चल रही है।

राहुल गांधी से मुलाकात और ‘नो वैकेंसी’ का दावा

एक पॉडकास्ट बातचीत में रशीद किदवई ने दावा किया कि शुभेंदु अधिकारी ने राहुल गांधी से मुलाकात कर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई थी। कथित तौर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनाए जाने की भी बात रखी थी।

किदवई के अनुसार, राहुल गांधी ने उन्हें जवाब दिया कि फिलहाल पार्टी में ऐसी कोई जगह उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह का जवाब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. विजय (विजय) को भी मिला था, जब उन्होंने वर्षों पहले कांग्रेस में आने की इच्छा जताई थी।

हालांकि कांग्रेस या शुभेंदु अधिकारी की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्षेत्रीय दलों के खत्म होने से क्या कांग्रेस को होगा फायदा?

रशीद किदवई ने इस धारणा को भी खारिज किया कि क्षेत्रीय दल कमजोर होंगे तो उसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा। उनका कहना है कि भारत की राजनीति अब इतनी विविध हो चुकी है कि कांग्रेस अधिकांश राज्यों में सहयोगी दलों के बिना बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा कि केरल जैसे कुछ राज्यों को छोड़ दें तो कई जगह कांग्रेस की चुनावी ताकत गठबंधन सहयोगियों पर भी निर्भर करती है। ऐसे में क्षेत्रीय दलों का महत्व अभी भी बना हुआ है।

ममता बनर्जी और गांधी परिवार के रिश्तों पर भी चर्चा

बातचीत के दौरान किदवई ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गांधी परिवार के रिश्तों पर भी टिप्पणी की। उनके अनुसार, ममता बनर्जी के सोनिया गांधी और दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ रिश्ते हमेशा बेहतर रहे हैं।

हालांकि उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और ममता बनर्जी के बीच वैसी राजनीतिक सहजता कभी विकसित नहीं हो सकी। इसी संदर्भ में उन्होंने एक पुरानी मुलाकात का जिक्र किया, जहां कथित तौर पर ममता ने राहुल गांधी की मौजूदगी को लेकर असहजता जताई थी।

हिमंत बिस्वा सरमा का पुराना विवाद फिर चर्चा में

चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि हिमंत ने भी कांग्रेस छोड़ने के बाद राहुल गांधी के साथ अपनी मुलाकातों को लेकर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई थी।

हिमंत बिस्वा सरमा कई बार दावा कर चुके हैं कि कांग्रेस में रहते हुए उन्हें नेतृत्व से अपेक्षित महत्व नहीं मिला। उन्होंने एक चर्चित घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि राहुल गांधी के साथ बैठक के दौरान उन्हें गंभीर राजनीतिक चर्चा की बजाय अलग अनुभव हुआ, जिसने उनके मन में सवाल खड़े किए।

क्यों अहम हैं ये दावे?

रशीद किदवई के ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं जब विपक्षी राजनीति, क्षेत्रीय दलों की भूमिका और 2029 की राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा तेज है। शुभेंदु अधिकारी आज भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और पश्चिम बंगाल में पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस में जाने की कथित कोशिश का दावा राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे सकता है।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये दावे वरिष्ठ पत्रकार की टिप्पणी पर आधारित हैं और संबंधित नेताओं या दलों की ओर से इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।