Onion Price: त्योहारों के बीच रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों को सरकार फिलहाल 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर राहत दे रही है, लेकिन यह सुविधा दिवाली तक ही जारी रहने की संभावना है। इसके बाद सरकारी सस्ती प्याज की बिक्री बंद करने की तैयारी है। फिलहाल नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) देश के 100 से अधिक शहरों में प्याज बेच रहे हैं। इसके बावजूद बाजार में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। दिल्ली-NCR में अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। अब सरकार की नजर नई फसल की आवक पर है। उम्मीद है कि बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों को नीचे लाने में मदद मिलेगी।
₹35 किलो वाली प्याज पर कब लगेगा ब्रेक? दिवाली तक राहत की उम्मीद
सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत देने के लिए बफर स्टॉक से इसकी बिक्री शुरू की थी। इस व्यवस्था के तहत नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।
लेकिन अब इस राहत को दिवाली तक ही जारी रखने की योजना है। इसके पीछे मुख्य वजह बाजार में नई फसल की आवक शुरू होना बताया जा रहा है। सरकार और संबंधित एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में मंडियों में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में सरकारी स्टॉक से सस्ती प्याज बेचने की जरूरत कम हो सकती है।
हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी बिक्री बंद होने के बाद बाजार में कीमतें किस स्तर पर रहेंगी। नई फसल की आवक बढ़ने से राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन खुदरा कीमतों में कितनी गिरावट आएगी, यह मांग और आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
एक साल में लगभग दोगुना हुआ प्याज का औसत भाव, दिल्ली-NCR में ज्यादा कीमत
प्याज की कीमतों में आई तेजी का अंदाजा सरकारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 को प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 51.71 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था। एक साल पहले इसी अवधि में यह कीमत 26.73 रुपये प्रति किलो थी।
यानी सालाना आधार पर प्याज का औसत भाव करीब 93 फीसदी बढ़ गया। दिल्ली और नोएडा में अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज 80 रुपये प्रति किलो तक बिकने की जानकारी दी गई है।
प्याज भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर घरों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतें बजट को प्रभावित करती हैं।
सरकारी बिक्री के बावजूद खुदरा बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आने से यह भी स्पष्ट होता है कि केवल सीमित मात्रा में सस्ती प्याज उपलब्ध कराना पूरे बाजार में कीमतें घटाने के लिए पर्याप्त नहीं रहा है।
सरकार के बफर स्टॉक से 23 हजार टन प्याज की बिक्री
प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने करीब 1.21 लाख मीट्रिक टन प्याज का बफर स्टॉक रखा था। इसी स्टॉक से नैफेड और एनसीसीएफ के जरिए अलग-अलग शहरों में बिक्री की जा रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नैफेड अब तक लगभग 11,800 मीट्रिक टन प्याज बेच चुका है। एनसीसीएफ की बिक्री भी करीब इतनी ही बताई गई है। इस तरह दोनों एजेंसियों ने मिलकर लगभग 23,000 मीट्रिक टन प्याज बाजार में उतारा है।
यह बिक्री 100 से अधिक शहरों में की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को बाजार भाव से कम कीमत पर प्याज मिल सके। हालांकि, सरकारी बिक्री का असर सभी शहरों में एक जैसा नहीं रहा है।
सरकार की रणनीति का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के बीच कीमतों को नियंत्रित रखना है। अब नई फसल की आवक बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार में आपूर्ति सुधरने से खुदरा कीमतों में कितनी राहत मिलती है।
उत्पादन 307 लाख टन, फिर भी महंगी क्यों है प्याज?
प्याज की कीमतों को लेकर एक अहम सवाल यह भी है कि जब देश में उत्पादन पर्याप्त बताया जा रहा है, तो बाजार में भाव इतने ऊंचे क्यों हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रबी सीजन में प्याज का उत्पादन करीब 307 लाख मीट्रिक टन रहा। वहीं, देश में हर महीने औसतन लगभग 17 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है। इस हिसाब से सालाना खपत करीब 204 लाख मीट्रिक टन बैठती है। यानी रबी सीजन का उत्पादन सालाना खपत के अनुमान से करीब 103 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
लेकिन उत्पादन और बाजार में हर समय उपलब्ध रहने वाली प्याज की मात्रा एक जैसी नहीं होती। फसल की आवक अलग-अलग समय पर होती है। इसके अलावा भंडारण, परिवहन, मांग और आपूर्ति में बदलाव भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
कर्नाटक और राजस्थान में नई प्याज की आवक शुरू होने की जानकारी है। आंध्र प्रदेश की मंडियों में भी नई फसल पहुंचने लगी है। आने वाले महीने में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब?
फिलहाल सरकार की ओर से 35 रुपये प्रति किलो वाली प्याज की बिक्री दिवाली तक जारी रखने की तैयारी है। इसके बाद बाजार में नई फसल की उपलब्धता कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। अगर मंडियों में आवक तेजी से बढ़ती है, तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। लेकिन सरकारी बिक्री बंद होने के बाद कीमतों में तत्काल गिरावट की गारंटी नहीं है।
त्योहारों के इस मौसम में आम परिवारों की नजर अब प्याज के खुदरा भाव पर रहेगी। आने वाले दिनों में मंडियों की आपूर्ति और बाजार की मांग तय करेगी कि रसोई के बजट को कितनी राहत मिलती है।
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