असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। कल ही दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के एक दिन बाद बुधवार को पवन खेड़ा असम पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए। सीएम की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराए गए मामले में उनसे विस्तार से पूछताछ की गई।
यह घटनाक्रम उन लाखों नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी प्रक्रिया को लेकर चिंतित रहते हैं। यह दिखाता है कि सत्ता में रहते हुए भी व्यक्तिगत आरोपों पर कार्रवाई हो रही है।
पवन खेड़ा का बयान और सहयोग का दावा
क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचने से पहले पवन खेड़ा ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “जांच होने दीजिए। मैं कानून का पालन करने आया हूं।” उन्होंने न्यायपालिका और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान व्यक्त किया।
पवन खेड़ा के वकील रीतम सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देते हुए शर्त रखी थी कि उन्हें असम पुलिस के सामने पेश होना होगा और जांच में पूरा सहयोग करना होगा। आज खेड़ा गुवाहाटी पहुंचे और उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस तथा रिनिकी भुइयां सरमा की कथित विदेशी संपत्तियों और पासपोर्ट संबंधी बयानों को दर्ज कराया। वे सबूत भी साथ लाए हैं जिनके आधार पर उन्होंने आरोप लगाए थे। वकील ने कहा कि यह जांच लंबी चल सकती है।
खेड़ा के आरोप और CM परिवार का जवाब
पवन खेड़ा ने कुछ समय पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं — अबूधाबी, मिस्र और एंटिगा-बारबुडा। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या वे भारतीय नागरिक हैं।
सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने इन आरोपों को मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताया था। उन्होंने कहा कि असम की जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता। इसके बाद सीएम की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ केस दर्ज कराया। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई को उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।
राजनीतिक तनाव और आगे की संभावना
यह पूरा मामला असम की राजनीति में तीखे टकराव को दर्शाता है। हिमंत बिस्व सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं और उनकी सरकार अब विपक्षी नेताओं के आरोपों पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है।
पवन खेड़ा का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। वहीं, असम सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। कानूनी प्रक्रिया अब कितनी लंबी चलेगी और इसमें क्या कुछ सामने आता है, इस पर सभी की नजर है।
ऐसे मामले आम जनता को यह संदेश देते हैं कि राजनीतिक आरोपों के पीछे चाहे जो मंशा हो, अंत में कानून की प्रक्रिया ही अंतिम फैसला करती है। असम के लोगों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है क्योंकि यह मुख्यमंत्री परिवार और विपक्ष के बीच सीधा टकराव है।
नई सरकार के गठन के तुरंत बाद शुरू हुई यह कार्रवाई आने वाले दिनों में असम की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


