आम आदमी पार्टी में आई बड़ी टूट अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि निजी आरोपों तक पहुंच गई है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद ‘आप’ और उनके बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ताजा विवाद तब और बढ़ गया जब पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा की परिणीति चोपड़ा से शादी भी इसलिए संभव हुई क्योंकि उन्हें आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद बनाया था।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है।
वीडियो मैसेज से शुरू हुआ नया विवाद
राघव चड्ढा ने हाल ही में एक वीडियो संदेश जारी कर अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी का करियर छोड़कर राजनीति में कदम रखा और पार्टी को 15 साल दिए। लेकिन अब पार्टी का माहौल “जहरीला” हो गया है और कुछ लोग निजी फायदे के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने अपने फैसले को एक नौकरी बदलने के उदाहरण से समझाया। उनका कहना था कि जब कार्यस्थल पर काम करने की स्थिति न रहे, तो आगे बढ़ना ही बेहतर विकल्प होता है।
AAP का जवाब: ‘नौकरी बदलना और साजिश अलग बात’
राघव के इस बयान पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा जवाब दिया। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राजनीति को नौकरी से तुलना करना गलत है, क्योंकि पार्टी विचारधारा से जुड़ी होती है।
उन्होंने कहा कि नौकरी बदलते समय लोग नोटिस देते हैं और संस्थान को नुकसान नहीं पहुंचाते, जबकि यहां आरोप है कि राघव ने पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की। भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के बाद उन्होंने यह कदम उठाया और बीजेपी से नजदीकी बढ़ाई।
‘छवि बनाने में मिली मदद’, गंभीर आरोप
AAP नेता ने यह भी दावा किया कि राघव चड्ढा की सार्वजनिक छवि बनाने में केंद्र सरकार की भूमिका रही। उनके मुताबिक, कई ऐसे मुद्दे थे जिन्हें उठाने के लिए उन्हें संकेत दिए जाते थे, और फिर उन पर तुरंत कार्रवाई होती थी, जिससे उनकी छवि मजबूत होती थी।
हालांकि, इन आरोपों पर राघव चड्ढा की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शादी पर बयान ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की हो रही है जिसमें सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा की निजी जिंदगी को भी राजनीति से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अगर राघव राज्यसभा सांसद नहीं बने होते, तो उन्हें वह पहचान नहीं मिलती, जिसकी वजह से उनकी शादी भी संभव हुई।
यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर रही है, क्योंकि इसमें निजी जीवन को भी बहस का हिस्सा बना दिया गया है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि आम आदमी पार्टी में आई टूट सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि भावनात्मक और व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच चुकी है। आने वाले समय में यह टकराव और तेज हो सकता है, खासकर जब दोनों पक्ष सार्वजनिक मंचों पर लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
राजनीति में विचारधारा, व्यक्तिगत रिश्ते और सत्ता की रणनीति—तीनों का यह टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है।


