दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन ने बुधवार को उस वक्त नया राजनीतिक रंग ले लिया, जब राहुल गांधी ने कांग्रेस के तीन सांसदों की तुलना स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों अशफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल और भगत सिंह से कर दी। जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले इन क्रांतिकारियों की तरह आज ये नेता ‘वोट चोरों’ के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया, जब INDIA गठबंधन के कई सांसद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तय जगह तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया। इसके बाद करीब तीन घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
बस पर पहुंचे राहुल, तीन सांसदों को बताया आज का ‘क्रांतिकारी चेहरा’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से आयोजित लंच मीटिंग के बाद INDIA गठबंधन के नेता जंतर-मंतर जाने के लिए निकले थे। राहुल गांधी भी एक बस में सवार होकर प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े। लेकिन अशोक रोड पर शांगरी-ला होटल के पास सुरक्षा व्यवस्था के कारण बसों को रोक दिया गया।
इसी दौरान राहुल गांधी ने बस में मौजूद कांग्रेस के तीन सांसदों—इमरान प्रतापगढ़ी, दीपेंद्र हुड्डा और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग—का जिक्र किया। उन्होंने इमरान प्रतापगढ़ी, दीपेंद्र हुड्डा और राजा वडिंग को क्रमशः अशफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल और भगत सिंह से जोड़ते हुए कहा कि ये आज के दौर की वही तिकड़ी हैं।
राहुल ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, जबकि ये नेता आज ‘वोट चोरों’ के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, तब तक विरोध जारी रहेगा’
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने अपना रुख साफ रखा। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
राहुल ने इस आंदोलन को लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि यह लड़ाई देश की सबसे पवित्र चीज की रक्षा के लिए है। उन्होंने INDIA गठबंधन के उन सांसदों का भी आभार जताया, जो संसद के भीतर और सड़क पर इस मुद्दे को लेकर विरोध कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शन रोक सकती है, नेताओं को बैठक करने से रोक सकती है, लेकिन विपक्ष के लोगों की इच्छाशक्ति को खत्म नहीं कर सकती।
विपक्ष का आरोप है कि चुनावों में ‘वोट चोरी’ हुई है। इसी आरोप को लेकर वह चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बना रहा है। हालांकि इन आरोपों को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच तीखा मतभेद बना हुआ है।
लंच मीटिंग से जंतर-मंतर तक पहुंचा विरोध
बुधवार के प्रदर्शन की शुरुआत INDIA गठबंधन के नेताओं की लंच मीटिंग से हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से सागर रत्ना रेस्टोरेंट में यह बैठक आयोजित की गई थी। इसमें विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए।
बैठक के बाद नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की योजना बनाई। प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा TMC, CPI-M, CPI, RJD, IUML समेत कुछ अन्य दलों के सांसद भी शामिल थे।
लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से करीब एक किलोमीटर पहले ही रोक दिया। इसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
प्रियंका गांधी सड़क पर लेटीं, तीन घंटे चला हाईवोल्टेज घटनाक्रम
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस वक्त और गरमा गई जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अन्य महिला नेताओं के साथ सड़क पर बैठ गईं और फिर पीठ के बल लेट गईं। उनके हाथ में संविधान की प्रति थी।
उधर राहुल गांधी को पुलिस की ओर से हिरासत में लेने के लिए वैन में बैठाने की कोशिश की गई, जिसका उन्होंने विरोध किया। इस दौरान INDIA गठबंधन के नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
करीब तीन घंटे तक चले इस घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता की लड़ाई बता रहा है, वहीं इस पूरे विवाद का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग बनी हुई है।
फिलहाल राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने अपना आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के साथ-साथ सड़क की राजनीति में भी और जोर पकड़ सकता है।



