राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजे पूरी तरह आने से पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने संसद के उच्च सदन में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। कई राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जबकि मध्य प्रदेश जैसे अहम राज्य में भाजपा ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक बढ़त का संकेत दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्ष के कई नेता भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। हालांकि झारखंड और मिजोरम की कुछ सीटों पर मुकाबला अभी बाकी है, लेकिन अब तक के नतीजों ने राज्यसभा का गणित काफी हद तक NDA के पक्ष में झुका दिया है।
चुनाव से पहले ही NDA ने बनाई मजबूत बढ़त
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने से NDA को बड़ा फायदा मिला है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के 15 से अधिक उम्मीदवार बिना मतदान के ही उच्च सदन पहुंच चुके हैं।
सबसे बड़ी सफलता मध्य प्रदेश में मिली, जहां भाजपा के तीनों उम्मीदवार—तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट—निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। इसके अलावा गुजरात, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, ओडिशा और अन्य राज्यों में भी NDA समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
इन परिणामों से साफ संकेत मिल रहा है कि कई राज्यों में भाजपा का संगठनात्मक और विधायी प्रभाव पहले से अधिक मजबूत हुआ है।
किन राज्यों में अभी बाकी है मुकाबला?
हालांकि अधिकांश सीटों पर तस्वीर साफ हो चुकी है, लेकिन झारखंड और मिजोरम में अभी मुकाबला बाकी है। झारखंड की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार मैदान में हैं।
यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच मुकाबला है। विधानसभा में INDIA गठबंधन के पास बहुमत है, लेकिन चुनावी गणित को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है।
मिजोरम की एकमात्र सीट पर सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) और मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा।
कांग्रेस भी बचाने में सफल रही अपनी मौजूदगी
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को भी कुछ महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं। कर्नाटक से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मंसूर अली खान और अन्य उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं।
राजस्थान में कांग्रेस के नीरज डांगी निर्विरोध निर्वाचित हुए। तमिलनाडु में कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती भी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंच गए।
हालांकि कई राज्यों में भाजपा की बढ़ती ताकत के बीच कांग्रेस की जीत मुख्य रूप से उन राज्यों तक सीमित रही, जहां उसे क्षेत्रीय दलों या सत्ता पक्ष का समर्थन प्राप्त था।
गुजरात से लेकर आंध्र तक NDA का दबदबा
गुजरात में भाजपा के चारों उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे। आंध्र प्रदेश में NDA गठबंधन के चारों उम्मीदवारों को जीत मिली, जिनमें तीन तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और एक जनसेना पार्टी के उम्मीदवार शामिल हैं।
मेघालय में एनपीपी के जेम्स संगमा, महाराष्ट्र में एनसीपी के राजेंद्र जैन और ओडिशा में भाजपा के देवाशीष सामंतराय भी निर्विरोध निर्वाचित हुए।
इन परिणामों ने यह संकेत दिया है कि भाजपा और NDA सहयोगी दलों का प्रभाव कई राज्यों में लगातार बढ़ रहा है।
राज्यसभा का गणित क्यों है महत्वपूर्ण?
राज्यसभा में मजबूत संख्या किसी भी सरकार के लिए बेहद अहम होती है। लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद कई विधेयकों को पारित कराने के लिए उच्च सदन में पर्याप्त समर्थन जरूरी होता है।
NDA की बढ़ती संख्या से केंद्र सरकार को विधायी एजेंडा आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं विपक्ष के लिए चुनौती यह होगी कि वह राज्यसभा में अपनी प्रभावी मौजूदगी बनाए रखे।
झारखंड और मिजोरम के नतीजों के बाद राज्यसभा की अंतिम तस्वीर और स्पष्ट होगी, लेकिन अब तक के परिणामों ने इतना जरूर दिखा दिया है कि NDA ने इस चुनावी दौर में अपनी राजनीतिक स्थिति और मजबूत कर ली है।




