अयोध्या में राम मंदिर के संचालन और उससे जुड़े बड़े प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले CEO पद के लिए सिर्फ एक नाम पर विचार नहीं हुआ था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO के चयन से पहले तीन नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इनमें पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के साथ वर्तमान मेजर जनरल संजय प्रताप विश्वाश राव और राजस्थान कैडर की सेवानिवृत्त IAS अधिकारी श्रुति भारद्वाज शामिल थीं। चयन प्रक्रिया के बाद ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के नाम पर भरोसा जताया। उनके लंबे सैन्य अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति अब चर्चा में है।
जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले हैं। वह भारतीय वायुसेना के बेहद अनुभवी अधिकारी रहे हैं और एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ यानी AOC-in-C रह चुके हैं। करीब चार दशक के सैन्य करियर के बाद अब उनके सामने अयोध्या में एक अलग तरह की जिम्मेदारी होगी।
तीन नाम शॉर्टलिस्ट हुए, फिर मिश्रा पर बनी सहमति
राम मंदिर CEO के चयन के लिए जिस प्रक्रिया में नामों पर विचार किया गया, उसमें तीन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करके ट्रस्ट के सामने भेजा गया था।
इनमें पहला नाम पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का था। दूसरा नाम महाराष्ट्र के रहने वाले मेजर जनरल संजय प्रताप विश्वाश राव का था, जो उस समय सेना में मेजर जनरल के पद पर कार्यरत थे और इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं। तीसरा नाम राजस्थान कैडर की IAS अधिकारी श्रुति भारद्वाज का था, जो इसी महीने सेवानिवृत्त हुई हैं।
इस चयन में एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया। इंटरव्यू के समय इन तीनों में सिर्फ जितेंद्र मिश्रा ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। संजय प्रताप विश्वाश राव और श्रुति भारद्वाज उस समय अपनी सरकारी सेवा में थे।
अंततः तीन नामों में से जितेंद्र मिश्रा का चयन हुआ और वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO बने।
फाइटर पायलट से एयर मार्शल तक का लंबा सफर
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर काफी लंबा रहा है। उन्होंने दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में बतौर फाइटर पायलट प्रवेश किया था। इसके बाद करीब 39 साल की सेवा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ जिम्मेदारियां संभालीं।
उनके करियर में सिर्फ ऑपरेशनल उड़ानें ही नहीं रहीं। उन्होंने फाइटर और टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। ट्रेनिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं और रणनीतिक योजना से जुड़े कामों में भी भूमिका निभाई।
उनके पास 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने 18 से ज्यादा अलग-अलग प्रकार के फाइटर एयरक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। इस अनुभव ने उन्हें वायुसेना में एक अनुभवी अधिकारी के तौर पर पहचान दिलाई।
वेस्टर्न एयर कमांड की कमान भी संभाली
जितेंद्र मिश्रा के करियर की अहम जिम्मेदारियों में भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड का नेतृत्व भी शामिल रहा है। वह 2025 में इसके एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वह इसी कमांड की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में उनके सैन्य अनुभव में ऑपरेशनल कमांड के साथ-साथ रणनीतिक स्तर पर निर्णय लेने का अनुभव भी शामिल रहा है।
अब उनकी भूमिका पूरी तरह अलग क्षेत्र में होगी। राम मंदिर CEO के तौर पर उन्हें मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियों को संभालना होगा। हालांकि उपलब्ध जानकारी में उनके CEO पद की विस्तृत जिम्मेदारियों का उल्लेख नहीं है, लेकिन जिस पृष्ठभूमि से वह आते हैं, वह इस नियुक्ति को खास बनाती है।
परिवार से भी रहा शिक्षा और सेवा का जुड़ाव
जितेंद्र मिश्रा के पारिवारिक जीवन की बात करें तो उनके माता-पिता लेक्चरर रहे हैं, जबकि उनकी बहन डॉक्टर थीं। यानी परिवार में शिक्षा और पेशेवर सेवा की मजबूत पृष्ठभूमि रही है।
उनका लगभग चार दशक लंबा सैन्य सफर अब पूरा हो चुका है। फाइटर पायलट के रूप में शुरुआत करने वाले जितेंद्र मिश्रा एयर मार्शल बने, वायुसेना की महत्वपूर्ण कमांड संभाली और अब अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासनिक नेतृत्व की नई भूमिका में नजर आएंगे।
राम मंदिर CEO के चयन के लिए जिन तीन नामों पर विचार हुआ था, उनमें संजय प्रताप विश्वाश राव और श्रुति भारद्वाज भी अपने-अपने क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी हैं। लेकिन अंतिम निर्णय पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के पक्ष में गया। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति के साथ अब यह भी ध्यान खींच रहा है कि एक लंबे सैन्य अनुभव वाला अधिकारी मंदिर ट्रस्ट की इस नई प्रशासनिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है।


