अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बीच एक नया विवाद सामने आया है। भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव एवं 1970 बैच के आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण ने दावा किया है कि उनके परिवार की ओर से राम मंदिर में भेंट की गई करीब 800 ग्राम सोने से जड़ित रामचरितमानस अब मंदिर परिसर में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार शिकायत और पत्र लिखने के बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
एस. लक्ष्मीनारायण के मुताबिक, उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी से पहले करीब सवा कुंतल वजन की विशेष रामचरितमानस मंदिर को भेंट की थी। उनका दावा है कि इसमें लगभग 800 ग्राम सोने का उपयोग किया गया था। कुछ महीनों बाद उनके रिश्तेदारों ने मंदिर में वह रामचरितमानस नहीं देखी, जिसके बाद उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों से संपर्क किया।
पूर्व गृह सचिव का कहना है कि उन्होंने कई बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की और पत्र भी लिखे, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें दान की गई वस्तु की कोई रसीद भी नहीं दी गई।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने राम मंदिर निर्माण से जुड़े पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नृपेंद्र मिश्र से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। अंततः उन्होंने इसे भगवान को समर्पित दान मानकर मामला छोड़ दिया, लेकिन हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक की।
इस बीच, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों का हवाला दिया और लिखा कि यदि यह सच है तो यह “महापाप” है।
उधर, राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच एसआईटी और पुलिस द्वारा जारी है। अब तक इस प्रकरण में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, दान और अन्य पहलुओं की जांच कर रही हैं। फिलहाल, पूर्व गृह सचिव के आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


