RCB की ट्रॉफी जश्न के बीच सदमा: विराट कोहली के फिटनेस गुरु बसु शंकर ने ले लिया संन्यास!

RCB की ट्रॉफी जश्न के बीच सदमा: विराट कोहली के फिटनेस गुरु बसु शंकर ने ले लिया संन्यास!

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के आईपीएल 2026 खिताब जीतने का जश्न पूरे देश में चल रहा है, लेकिन इस खुशी के बीच टीम को एक भावुक मोड़ मिला है। टीम के स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच बसु शंकर ने कोचिंग से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। विराट कोहली समेत कई खिलाड़ियों की फिटनेस का शिल्पकार माने जाने वाले बसु शंकर का यह फैसला क्रिकेट प्रेमियों के लिए काफी अहम है।

बसु शंकर कौन थे? एक स्प्रिंटर से क्रिकेट कोच तक का सफर

बसु शंकर का जन्म 3 अगस्त 1968 को हुआ था। वे नेशनल स्तर के स्प्रिंटर रह चुके हैं। उनका कोचिंग सफर 1999 में तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के साथ शुरू हुआ। साल 2004 में वे नेशनल क्रिकेट एकेडमी के हेड ट्रेनर बने। फिर 2009 से वे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ जुड़े और वहां हेड स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच के रूप में काम करते रहे।

उन्होंने सिर्फ क्रिकेटरों को नहीं, बल्कि दिनेश कार्तिक, आर. अश्विन और दीपिका पल्लीकल जैसी कई बड़ी हस्तियों को भी ट्रेनिंग दी है। उनके करियर में फिटनेस को विज्ञान की तरह समझने और खिलाड़ियों को उसके अनुसार ढालने की खासियत रही।

विराट कोहली को चीकू से चीता बनाने वाला जादू

विराट कोहली को पहले चीकू के नाम से पुकारा जाता था। साल 2014 तक उनकी बॉडी काफी भारी थी और फिटनेस की दिशा में काफी काम बाकी था। 2015 में बसु शंकर के साथ काम शुरू होने के बाद सब बदल गया।

शंकर ने विराट को सही वेट ट्रेनिंग, रिकवरी टेक्नीक, इंजरी प्रिवेंशन और डाइट प्लानिंग सिखाई। नतीजा यह रहा कि विराट की कमर की पुरानी समस्या दूर हो गई, उनकी ताकत बढ़ी और रिकवरी तेज हुई। सोशल मीडिया पर उनके सिक्स पैक एब्स की तस्वीरें चर्चा का विषय बनीं। रन बनाने की गति भी पहले से कहीं ज्यादा तेज हुई।

आज जो विराट कोहली दुनिया की सबसे फिट क्रिकेटरों में गिने जाते हैं, उसके पीछे बसु शंकर का अहम योगदान है।

विराट के गुरु और भारतीय क्रिकेट पर छोड़ा अमिट प्रभाव

विराट कोहली ने खुद कई बार सार्वजनिक रूप से बसु शंकर को अपना गुरु बताया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि 2015 में शंकर के साथ काम करने के बाद ही उनकी असली ट्रांसफॉर्मेशन शुरू हुई।

बसु शंकर के तरीकों ने सिर्फ विराट को नहीं बदला, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट टीम में फिटनेस की नई संस्कृति स्थापित की। आज टीम इंडिया के ज्यादातर खिलाड़ी बेहद फिट नजर आते हैं। विदेशी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज जीतना और आईसीसी टूर्नामेंट्स में बेहतर प्रदर्शन इसी फिटनेस कल्चर का नतीजा है।

आरसीबी के आईपीएल 2026 खिताब पर बसु शंकर का भी अहम योगदान रहा। लेकिन अब वे कोचिंग क्षेत्र से अलविदा कह रहे हैं। उनका जाना न सिर्फ आरसीबी के लिए, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ी कमी साबित होगा।

फैंस और टीम पर क्या पड़ेगा असर?

यह संन्यास कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। बसु शंकर ने दिखाया कि सही ट्रेनिंग और समर्पण से कोई भी खिलाड़ी अपनी सीमाओं को पार कर सकता है। आम फैंस के लिए यह याद दिलाता है कि विराट जैसी सफलता के पीछे सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और सही गाइडेंस भी होती है।

आरसीबी के खिताबी जश्न के बीच बसु शंकर का यह फैसला भावुक पलों को और गहरा बना रहा है। निश्चित रूप से उनका योगदान हमेशा क्रिकेट इतिहास में याद रखा जाएगा।