आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी नेतृत्व को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे संदीप पाठक पार्टी छोड़ने जैसा कोई कदम उठा सकते हैं। संजय सिंह ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर भी इस घटनाक्रम से हैरानी हुई और अफसोस भी हुआ। वहीं, उन्होंने कुछ अन्य नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे केंद्रीय एजेंसियों के दबाव और राजनीतिक परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया।
पार्टी छोड़ने की भनक तक नहीं लगी: संजय सिंह
आम आदमी पार्टी में हाल के दिनों में हुए राजनीतिक बदलावों और नेताओं के पार्टी से अलग होने को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच संजय सिंह ने कहा कि संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना उनके लिए अप्रत्याशित था।
उन्होंने कहा कि किसी नेता को रोकने की कोशिश तभी की जा सकती है, जब यह संकेत मिले कि वह संगठन छोड़ने की तैयारी कर रहा है। लेकिन संदीप पाठक के मामले में ऐसा कोई संकेत कभी नहीं मिला। संजय सिंह के मुताबिक, पार्टी के भीतर किसी को भी यह महसूस नहीं हुआ कि वह इतना बड़ा फैसला लेने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि यह बात वह पूरी ईमानदारी से कह रहे हैं और इसमें किसी तरह की राजनीतिक रणनीति या बयानबाजी शामिल नहीं है।
राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के जाने पर क्या बोले?
इंटरव्यू के दौरान राघव चड्ढा समेत कई नेताओं के पार्टी से अलग होने के मुद्दे पर भी सवाल पूछा गया। इस पर संजय सिंह ने कहा कि हर व्यक्ति का राजनीतिक दबाव झेलने का तरीका अलग होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं पर जांच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया गया। उनका दावा था कि कुछ मामलों में कारोबार से जुड़े लोगों और उनके परिवारों पर कार्रवाई का डर दिखाया गया। इसी दबाव के चलते कुछ नेताओं ने ऐसे फैसले लिए, जिनकी शायद पहले किसी ने कल्पना नहीं की थी।
हालांकि, उन्होंने राघव चड्ढा के बारे में ज्यादा विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया और मुख्य रूप से पार्टी छोड़ने वाले अन्य नेताओं की परिस्थितियों पर बात की।
संदीप पाठक की भूमिका को लेकर भी रखी बात
संजय सिंह ने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि संदीप पाठक को पार्टी में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यह आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
उनके मुताबिक, संगठन विस्तार से लेकर चुनावी रणनीति तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संदीप पाठक को सौंपी गई थीं। पंजाब में पार्टी के विस्तार, दिल्ली संगठन के संचालन और राज्यसभा से जुड़ी जिम्मेदारियों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संजय सिंह ने कहा कि जिस व्यक्ति को संगठन के निर्माण और संचालन की इतनी बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हों, उसकी उपेक्षा होने की बात कहना उचित नहीं होगा।
AAP के सामने नई राजनीतिक चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का अचानक अलग होना संगठन के लिए चुनौती पैदा करता है। आम आदमी पार्टी के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
संजय सिंह के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व अब भी कुछ नेताओं के अचानक लिए गए फैसलों को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। वहीं, उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की कि संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और अवसरों की कोई कमी नहीं थी।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इन राजनीतिक झटकों से कैसे उबरती है और अपने संगठनात्मक ढांचे को किस तरह मजबूत करती है।

